अब बिहार में E-क्लीनिक से होगा इलाज: बड़े डॉक्टरों को दिखाने के लिए नहीं जाना होगा दिल्ली-मुम्बई, तैयार होगा इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकार्ड

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पटना2 मिनट पहले

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स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बिहार में पहली बार लांच किया ई-क्लीनिक।

बिहार की स्वास्थ्य सेवा में नई कड़ी ई-क्लीनिक की जुड़ गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बिहार में इस सेवा को लांच कर दिया है। राज्य में तत्काल 100 क्लीनिक काम करेंगे। इसके बाद इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी। ई-क्लीनिक (हेल्थ कियोस्क) के साथ अगले एक साल में एक करोड़ लोगों का इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकार्ड भी बनाया जाएगा। चिकित्सा की यह आधुनिक विधि जिफ्फीहेल्थ बिहार में लेकर आई है। इससे अब बड़े डॉक्टरों को दिखाने के लिए भी मरीजों को राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

हजारों किलोमीटर दूर से होगा इलाज

10 सेवाओं में हजारों किलोमीटर दूर बैठे डॉक्टर मरीज के हृदय की धड़कन, बीपी, शुगर, ऑक्सीजन लेवल आदि रियल टाइम में सुन और देख सकेंगे। इससे इलाज के लिए लोगों को बड़े शहर में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिफ्फीहेल्थ के सहयोग से बिहार की स्वास्थ्य सेवा में बड़ी पहल हुई है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने इस सेवा को लांच कर कहा है, ‘यह बड़ी पहल है। इससे लोगों को बड़ा लाभ होगा।’

स्वास्थ्य मंत्री ने लांच की नई सेवा

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने ई – क्लीनिक सेवा को लांच किया है। स्वास्थ्य मंत्री का कहना है, ‘यह एक अच्छी शुरुआत है। बिहार के पढ़े-लिखे लोग पूरी दुनिया में ख्याति अर्जित कर रहे हैं, लेकिन इस मामले में खास बात यह है कि दुनिया में ख्याति अर्जित करने के बाद लोग अपने बिहार की उन्नति के लिए भी काम कर रहे हैं। ऐसे लोग बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर करने के लिए प्रयास कर रहे हैं जो अत्यंत सराहनीय है। जिफ्फीहेल्थ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सह संस्थापक बिहार के ही निवासी हैं। यह संस्थान लोगों का स्वास्थ्य रिकार्ड इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से बनाने का भी लक्ष्य रखे हैं।’

ऐसे आया ई-क्लीनिक का कांसेप्ट

जिफ्फीहेल्थ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मधुबनी के रहिकपुर निवासी कैप्टन इन्द्र कुमार ने बताया, ‘मामूली डायरिया की वजह से उनका एक चचेरा भाई मर गया था। तब से वह बिहार के स्वास्थ्य सेवा की बेहतरी के लिए कुछ करना चाह रहे थे। बिहार में 17 हजार 650 लोगों पर एक डॉक्टर है, जबकि देश स्तर पर देखा जाए तो 11 हजार 97 लोगों की आबादी पर एक डॉक्टर है। वहीं देश में उपलब्ध 82 प्रतिशत डॉक्टरों तक सिर्फ 20 प्रतिशत आबादी की ही पहुंच है। बाकी 18 प्रतिशत डॉक्टर 80 प्रतिशत आबादी का इलाज करते हैं। ई-क्लीनिक व हेल्थ कियोस्क से यह अनुपात सुधरेगा। लोगों को अपने घर के पास उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवा सुलभ हो पाएगा।’

डिजिटल हेल्थ केयर

इस स्टार्ट-अप का उद्देश्य प्रभावी डिजिटल हेल्थकेयर प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना है। इसका आईओटी एकीकृत समाधान पूरी तरह से ऑनलाइन और ऑफलाइन परामर्श के बीच की खाई को पाटता है। यह तीन-तरफा वीडियो परामर्श सुविधा भी प्रदान करता है, जो हमारी युवा पीढ़ी के लिए फायदेमंद है। खासकर वो जो विभिन्न शहरों में रहते हैं और अपने माता-पिता की देखभाल करना चाहते हैं। रोगी या चिकित्सक की सहायता के लिए वीडियो परामर्श में किसी तीसरे व्यक्ति को शामिल किया जा सकता है।

कोविड की वजह से लोगों को घर में रहने की व्यवस्था ने माता-पिता को अपने बच्चों से अलग होने के लिए मजबूर किया। खासकर जिन्होंने विभिन्न स्थानों पर काम किया या पढ़ाई की। जिफ्फी हेल्थ की मदद से रोगी के माता-पिता या अभिभावक परामर्श में शामिल हो सकते हैं और अपने प्रियजन की स्वास्थ्य कठिनाइयों के बारे में जान सकते हैं। लक्ष्य है कि प्रत्येक व्यक्ति को सस्ती और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना और समय व लागत को लोगों के अनुसार करके बेहतर ग्राहक यात्रा प्रदान करना है। लाइव क्यू-मैनेजमेंट, वॉयस क्लिनिकल नोट, इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक और ओपीडी प्रबंधन के साथ फार्मेसी जैसे कुछ तरीके व औजार हैं, जो जिफ्फीहेल्थ को अलग करता है।

ऐसे चलेगी ई-क्लीनिक

  • फार्मेसी की दुकान में ई-क्लीनिक खोली जाएगाी।
  • इसमें हेल्थ कियोस्क लगाया जाएगा।
  • मरीज उसके सामने बैठेगा, उसमें कुछ इक्वीमेंट्स लगे रहेंगे।
  • इंडीकेट्स से मरीज की धड़कन, ऑक्सीजन लेवल, बीपी, शुगर आदि रियल टाइम पता चलेगा।
  • इससे दूर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टर को पूरी जानकारी मिल जाएगी।
  • फिर डॉक्टर परीक्षण के बाद दवा लिखेंगे, जो फॉर्मेसी वालों को मिल जाएगा।
  • यदि डॉक्टर को लगेगा कि और जांच की जरूरत है तो वहीं एसोसिएट लैबोरेट्ररी में सैंपल लिया जाएगा।
  • हेल्थ रिकॉर्ड भी कलेक्ट करेंगे जो नेशनल हेल्थ आईडी से जुड़ा रहेगा।
  • भविष्य में मरीज कहीं भी दिखाता है तो डॉक्टर को उस मरीज का पूर्व का हेल्थ रिकार्ड मिल जाएगा।

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