ऑक्सीजन की किल्लत पर संकट में इलाज: अस्पताल ने कहा हमारे पास मर जाएंगे मरीज, सरकारी अस्पताल में करा दीजिए शिफ्ट, सरकार की तरफ से नहीं आया कोई जवाब

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पटना15 मिनट पहले

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  • स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डीएम ने की ऑक्सीजन कंपनियों और डॉक्टरों के साथ बैठक

पटना के समय हॉस्पिटल के निदेशक डॉ अखिलेश कुमार सिंह ने अधिकारियों से कहा कि हमारे यहां भर्ती कोरोना के 75 संक्रमितों को सरकारी अस्पताल में शिफ्ट करा दीजिए, नहीं तो मर जाएंगे। जब ऑक्सीजन की व्यवस्था ही नहीं है तो मरीजों को भर्ती करने से क्या फायदा है। ऑक्सीजन की डिमांड की जा रही है, सिलेंडर नहीं मिल रहा है। जनता अस्पताल में तोड़फोड़ कर रही है। सड़क जाम कर रही है। पुलिस-प्रशासन कहीं से मदद नहीं मिल रही है। ऐसे में मरीजों की मौत पर अस्पताल की सुरक्षा पर बड़ा खतरा होगा। डॉक्टर के इस आग्रह पर भी कोई जवाब नहीं मिला। डॉक्टर ने यह आग्रह ऑक्सीजन की कमी को लेकर आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मौजूद स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के साथ पटना DM के सामने किया है।

जूम के जरिए हुई बैठक में पटना के प्राइवेट अस्पतालों और गैस कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। ऑक्सीजन की समस्या पर घंटों मंथन हुआ। DM ने अब एक कमेटी बनाने का निर्णय लिया जिससे इस समस्या का समाधान हो सके। बैठक में ऑक्सीजन के कामर्शियल सेक्टर में उपयोग को बंद कराने को लेकर मांग की गई है। इस पर भी सरकार के स्तर से विचार किया जा सकता है।

ऑक्सीजन कंपनियों ने खड़े किए हाथ

ऑक्सीजन कंपनियों ने लिक्विड मटेरियल की उपलब्धता नहीं होने को लेकर हाथ खड़े कर लिए। कंपनियों ने कहा है कि जो उनकी क्षमता है, वह उस हिसाब से ऑक्सीजन तैयार कर रहे हैं। जब तक लिक्विड की उपलब्धता नहीं होती है तब तक ऐसी समस्या आती रहेगी। इस पर DM ने पहल की और कहा है इसके लिए टीम बनाई जा रही है जिससे समस्या का समाधान कराया जा सके। बैठक में जिलाधिकारी ने सभी आपूर्तिकर्ताओं को अपने-अपने उत्पादन का 90% ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पतालों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में ऑक्सीजन की नियमित एवं निर्बाध आपूर्ति हो सके। जिलाधिकारी द्वारा संबंधित एजेंसी को कोरोना संकट को देखते हुए अस्पतालों को प्राथमिकता के आधार पर मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

एजेंसियों में दंडाधिकारियों की नियुक्ति

DM ने कहा है कि प्रत्येक एजेंसी पर एक-एक दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है, जिनके द्वारा अस्पतालों को की गई आपूर्ति संबंधी कार्यों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके लिए एजेंसी से संबद्ध अस्पताल, एजेंसी की क्षमता, एजेंसी द्वारा आपूर्ति के बारे में प्रतिदिन नजर रखी जाएगी। प्रत्येक प्राइवेट अस्पताल में एक-एक नोडल पदाधिकारी की भी तैनाती की गई है। उनके द्वारा संबंधित अस्पताल में बेड की संख्या, भर्ती मरीज की संख्या आवश्यक सिलेंडर की संख्या, आपूर्ति की गई सिलेंडर की संख्या के बारे में प्रतिदिन रिपोर्ट तैयार करने के साथ मॉनिटरिंग का निर्देश दिया गया है।

उद्योग विभाग भी करेगा सप्लाई

अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था उद्योग विभाग द्वारा की जाएगी। इसके लिए तैयारी शुरू की है। जिलाधिकारी ने अस्पतालों में आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने के लिए एक सेल का गठन करने का निर्देश दिया है, जिसमें महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, औषधि निरीक्षक एवं बियाडा के एक अधिकारी को शामिल करने को कहा गया है।

ऑक्सीजन सिलेंडर का नहीं होगा भंडारण

DM ने कहा कि कोई भी अस्पताल प्रतिदिन की आवश्यकता के अनुरूप ही सिलेंडर लेंगे। इसका अवैध भंडारण नहीं करेंगे ताकि सभी अस्पतालों में मरीजों की आवश्यकता के अनुरूप सिलेंडर उपलब्ध कराया जा सके। जिलाधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारी पटना सदर, दानापुर, पटना सिटी को सिलेंडर के अवैध भंडारण की जांच करने का सख्त निर्देश दिया। बैठक में सिविल सर्जन डॉ विभा कुमारी, जिला स्तरीय अधिकारी के साथ ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता तथा प्राइवेट अस्पताल के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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