ऑनलाइन जाॅब खाेजते-खाेजते बना साइबर फ्राॅड…सालाना कमाई 2 कराेड़: एटीएम से 2.50 लाख निकालकर जा रहे आरोपी को पुलिस ने दबाेचा

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पटनाएक घंटा पहले

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आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करती पुलिस।

दाे साल पहले इंटर पास किया। इसके बाद ऑनलाइन जाॅब खाेजते-खाेजते साइबर फ्राॅड गिराेह के सरगना के संपर्क में अा गया। अब कमीशन से साल में दो से ढाई करोड़ की कमाई कर रहा है। पत्रकारनगर थाने की पुलिस ने इस साइबर फ्रॉड विकास चौधरी को गुरुवार रात गिरफ्तार किया।

वह नालंदा के तेलमर थाना क्षेत्र का रहने वाला है। उसके पास से पुलिस ने 2.50 लाख कैश, छह डेबिट कार्ड, 9 पासबुक, 2 चेकबुक, एक फोन और एक स्कूटी बरामद की। वह नालंदा के साइबर गिरोह का सदस्य है। उसने पुलिस को बताया कि जब्त किए गए 2.50 लाख रुपए ठगी के हैं।

वह एटीएम से निकालकर अपने फ्लैट पर जा रहा था। गुरुवार की देर रात एसआई अविनाश कुमार ने गश्त के दौरान उसे योगीपुर नहर के पास पकड़ा। वह बाइपास की तरफ किराया का फ्लैट लेकर रहता है। उसके फ्लैट पर तीन और साइबर अपराधी मौजूद थे जो विकास की गिरफ्तारी के बाद भाग निकले। एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने कहा कि गिरोह के अन्य शातिरों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है।

विकास जिस गिरोह के लिए काम करता है उसका सरगना नालंदा के कतरीसराय का है। हालांकि विकास उसका नाम-पता नहीं बता रहा है। उसने बताया कि अपने नाम से तीन खाते खुलवाए हैं। उनमें से एचडीएफसी के खाते का ट्रांजक्शन डिटेल पुलिस को मिला है। ढाई सौ पन्ने के ट्रांजेक्शन डिटेल से पता चला कि विकास को कमीशन के रूप में एक साल में 67 लाख रुपए मिले हैं।

साइबर ठगी के साथ-साथ सट्टेबाजी भी
विकास के गिरोह में करीब 30 लोग हैं। ये नालंदा के साथ-साथ बिहार के अन्य शहरों में रहकर साइबर ठगी करते हैं। साथ ही यह गिरोह सट्टेबाजी भी कराता है। विकास ने कहा कि उसका गिरोह लोगों को केवाईसी अपडेट कराने, लोन देने, गिफ्ट वाउचर, फ्रेंचाइजी आदि के नाम पर झांसा देकर ठगी करता है।

दाे को पकड़ने पहुंची असम पुलिस
असम के जाेरहट के काराेबारियाें से 10 लाख का साइबर फ्राॅड के मामले में न्यू बाइपास इलाके के रहने वाले अगम कुमार व मनीष कुमार काे गिरफ्तार करने वहां की पुलिस पटना पहुंची। इन दाेनाें के खाते में रकम डाली गई है। जिन नंबराें से केवाईसी, इनाम मिलने का झांसा देकर रकम की ठगी की गई, उसका लाेकेशन भी पटना के न्यू बाइपास इलाके में मिला था। बैंक खाते में दर्ज पता पूरा नहीं होने से पुलिस को दाेनाें में से किसी का सुराग नहीं लगा।

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