कंगना के लिए भोजपुरी गायिका का ‘धिक्कार गीत’: गाने के जरिए बॉलीवुड एक्ट्रेस रनोट का नेहा सिंहा राठौर ने किया विरोध

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पटना27 मिनट पहले

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एक्ट्रेस कंगना रनोट को आजादी वाले विवादित बयान की चौतरफा निंदा हो रही है। इस कड़ी में भोजपुरी गायिका नेहा सिंह राठौर ने भी गाने के जरिए अपना विरोध जताया है। नेहा ने कंगना के बयान के विरोध में जो गाना बनाया है, उसे ‘धिक्कार गीत’ नाम दिया है। इस बार उन्होंने अभिनेत्री को नसीहत देते हुए गाया है- पद्मश्री पाके हेतना धधा गईलु कंगना

बता दें हाल ही में अभिनेत्री कंगना रनोट ने कहा था कि 1947 की आजादी भीख थी। असली आजादी 2014 में मिली। राष्ट्रपति के हाथों पद्म पुरस्कार लेने के बाद उनका यह बयान आया था। इसके बाद कई पार्टी के नेताओं ने उनसे पुरस्कार वापस लेने की मांग की थी।

गीत में लक्ष्मीबाई से लेकर भगत सिंह तक का जिक्र

नेहा सिंह राठौर का अपना अंदाज है। वह पारंपरिक गीतों से ज्यादा करंट मुद्दों पर गाए गीतों से चर्चा में रहती हैं। इस बार उन्होंने कंगना रनोट को नसीहत देते हुए गाया है- पद्मश्री पाके हेतना धधा गईलु कंगना…। इसे नेहा सिंह राठौर ने ‘धिक्कार गीत’ कहा है। पद्मश्री पाके हेतना धधा गईलु कंगना…रानी लक्ष्मीबाई लड़नी अंग्रेवन के संगना, 1857 के भुलाई गईला जंगना… राजगुरु, भगत सिंह, सुखदेव की भी चर्चा इस गीत में है कि कैसे ये सभी हंसते-हंसते फांसी का फंदा झूल गए।

एक पैसा दूई पैसा में करती है भक्ति वंदना

कंगना को नसीहत देते हुए नेहा ने कहा है कि एक-पैसा, दूई पैसा में भक्ति वंदना करती हैं। उन्हें इतिहास का पन्ना पलट कर देखने को कहा है। उन्होंने कहा है कि पद्मश्री पुरस्कार को भी कंगना ने विडंबना बना दिया। देश प्रेम का चोला हटा कर ढोंग छोड़ने की भी नसीहत नेहा ने दी है।

लोगों ने दी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं

यूट्यूब पर कंगना के इस गीत पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। वैभव मौर्या ने लिखा है- ‘कंगना कम से कम अपना फिल्म मणिकर्णिका का भी स्मरण कर लेतीं तो ऐसा नहीं बोलतीं। देवेन्द्र कुमार ने लिखा है- ‘गरम लोहे पर बढ़िया चोट मारी है। गीत सुनकर तबीयत खुश हो गई। गीत और लंबा लिखा होता तो और मजा आता।’

दयाराम यादव ने लिखा- ‘जिसने बलिदान दिया ही नहीं, वह आजाद मुक्त की परिभाषा नहीं समझ सकता।’ सुभाष शर्मा ने लिखा है- ‘भोजपुरी लोकगीत के माध्यम से बेबाक सबक कंगना जी के लिए है। अंधभक्ति भी अफीम की तरह है जो विवेक नष्ट कर देती है।’

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