केंद्राधीक्षकों पर लटकी कार्रवाई की तलवार: मनमानी से परीक्षार्थियों को हो रही परेशानी, अंधेरे में परीक्षा देने को विवश

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मुजफ्फरपुर25 मिनट पहले

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राज्य में इंटर परीक्षा जारी है। मुजफ्फरपुर में भी 65 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की जा रही है। दो दिनों में अबतक एक भी परीक्षार्थी निष्काषित नहीं हुआ है। कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराया जा रहा है। इसी दौरान दो केंद्राधीक्षकों सह हेडमास्टर की मनमानी सामने आयी है। जब DEO अब्दुस सलाम अंसारी ने केंद्र संख्या 3154 और 3152 का औचक निरीक्षण किया तो पाया कि यहां केंद्राधीक्षकों ने आदेश की अवहेलना की है।

दरअसल, मामला परीक्षार्थियों को अंधेरे कमरे में बैठाकर परीक्षा दिलाने का है। बोचहां के सरफुद्दीनपुर स्थित इंद्रप्रस्थ स्कूल में जिस कमरे में परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे हैं। उसमें रौशनी की किल्लत है। अंधेरे में वे परीक्षा देने को विवश हैं। इससे परीक्षार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कमरे में रौशनी की कोई व्यवस्था नहीं कि गयी है। इसपर DEO ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। कहा है कि जब केंद्राधीक्षक से पूछा गया तो उन्होंने राशि की कमी के कारण जेनरेटर की व्यवस्था नहीं करने की बात बताई गई। जबकि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पटना के निर्देश है कि कार्यालय व्यय मद में प्राप्त राशि मे किसी प्रकार की कमी होती है तो उचित प्रमाणक के साथ मांग पत्र प्रेषित किया जा सकता है। उक्त व्यय का भुगतान किया जाएगा।

राशि कमी का बनाया बहाना
उक्त निर्देश होने के बावजूद केंद्राधीक्षक द्वारा राशि की कमी का बहाना बनाया गया। जिसके कारण परीक्षार्थी अंधेरे में परीक्षा देने को विवश हैं। DEO ने कहा कि स्पष्टीकरण मांगा गया है। अगर जवाब से संतुष्ट नहीं हुए तो केंद्राधीक्षकों की काली सूची में उनका नाम दर्ज करने की अनुशंषा की जाएगी।

नियम विरुद्ध जाकर बनाया सिटिंग प्लान
दूसरा मामला पुरुषोत्तमपुर हाई स्कूल का है। DEO ने इसका भी निरीक्षण किया। यहां तो मामला और भी संगीन पाया गया। परीक्षा समिति के नियम विरुद्ध जाकर यहां सिटिंग प्लान कर दिया गया था। पर्याप्त जगह होने के बावजूद दो कमरों में ही परीक्षा आयोजित की जा रही थी। इसपर DEO ने सख्त आपत्ति जताई और सिटिंग प्लान को दुरुस्त करने को कहा। उन्होंने बताया कि किसी भी परिस्थिति में समिति के विरुद्ध जाकर सिटिंग प्लान नहीं करना है। क्योंकि इससे कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन होगा। फिर भी केंद्राधीक्षक द्वारा नियम विरुद्ध कार्य किया गया, जो उनकी स्वेच्छाचारिता और आदेश की अवहेलना को दर्शाता है। इनसे भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर काली सूची में नाम दर्ज करने की अनुशंसा की जाएगी।

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