कॉलेज में नहीं मिल रही बेटियों को नहीं मुफ्त शिक्षा: मधेपुरा में BA पार्ट 1 की छात्रा से एडमिशन के लिए 2400 रुपए की डिमांड

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मधेपुरा16 मिनट पहले

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शिकायत लेकर कुलपति कार्यालय पहुंचे अभिभावक।

बिहार में सुशासन के 9 साल पूरे होने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने छात्राओं और एससी/एसटी के छात्रों के लिए निःशुल्क शिक्षा देने की घोषणा की थी। इसे जुलाई 2015 में लागू किया गया। वर्ष 2020 में छात्र संगठन AISF के प्रदेश अध्यक्ष रंजीत पंडित ने भी इस मुद्दे पर पटना हाईकोर्ट में PIL दायर किया। इस पर कोर्ट ने भी आदेश दिया लेकिन मधेपुरा के कुछ महाविद्यालयों पर इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा।

मधेपुरा बीएन मंडल विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले कई सरकारी और गैर सरकारी महाविद्यालय सरकार और कोर्ट के आदेश का धड़ल्ले से मज़ाक उड़ा रहे हैं। बीएन विवि पहुंचे सहरसा जिला के भेलवा निवासी धनंजय कुमार अपनी बेटी के नामांकन के लिए भटक रहे हैं। घैलाढ़ आदर्श डिग्री कालेज में इनकी बेटी का पार्ट वन में नामांकन होना है लेकिन उससे 2400 रुपये की डिमांड की जा रही है। इस बात की शिकायत करने वे विश्वविद्यालय भी आए लेकिन कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला जबकि नामांकन का डेट 25 नवम्बर तक ही है।

इस संबंध में कॉलेज के प्राचार्य रतन कुमार का कहना है कि इस सम्बन्ध में उन्हें अब तक कोई सूचना नहीं दी गयी है। जबकि सरकारी कॉलेजों का भी हाल इससे अलग नहीं है टीपी कॉलेज और पी एस कॉलेज में भी एससी एसटी छात्रों से नामांकन के वक्त 1300 से 1700 तक रुपये वसूले जा रहे हैं।

इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने की माने तो अब तक चार बार विश्वविद्यालय के सभी महाविद्यालय को इस संबंध में पत्र भेजा जा चुका है यदि अब भी कोई महाविद्यालय छत्राओं और एससी /एसटी छात्रों से नामांकन के वक्त कोई फीस ले रहा है तो कोई छात्र सबूत के साथ शिकायत करते हैं तो कार्रवाई की जाएगी।

इसे लेकर पटना हाईकोर्ट में PIL दायर करने वाले AISF के पूर्व अध्यक्ष रंजीत पंडित ने बताया कि कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि सरकार यह गारंटी करें कि अब बिहार में किसी छात्रा और एससी एसटी के छात्रों से नामांकन के वक्त कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही जो राशि 2016 के बाद लिए गए उसे वापस किया जाय। लेकिन अभी भी ऐसी जानकारी मिल रही है कि कई महाविद्यालयों में ये राशि ली जा रही है। इसे लेकर एक बार फिर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

रिपोर्ट: सावन कुमार राय

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