गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर सवाल: बांस और प्लास्टिक से बने शेड में पढ़ते हैं प्रावि नारायणपुर घाट के 100 बच्चे

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कुशेश्वरस्थानएक घंटा पहले

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कुशेश्वरस्थान प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय नारायणपुर घाट में बांस के शेड में बच्चों को पढ़ाती शिक्षिका।

कुशेश्वरस्थान प्रखंड में कुल 67 प्राथमिक विद्यालय है। इसमें 16 विद्यालय 16 वर्षों से भवन विहीन है। इन विद्यालयों के छात्र चिलचिलाती धूप में खुले आसमान के नीचे पढ़ने के लिए मजबूर हैं। इससे इन विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति अमूमन कम होती है और यहां पढ़ने वाले छात्र बराबर बीमार पड़ते रहते हैं।

प्राथमिक विद्यालय नारायणपुर घाट, परसंडा, बिषहरिया सन्हौली, विष्णुपुर तथा गजबोर को भूमि उपलब्ध है। लेकिन यहां भवन नहीं है। जबकि प्राथमिक विद्यालय भटवन, मधुवन, तिलाठी, बिषहरिया (अजा), पिरोरी, दरबेपुर, तासमन पट्टी, कमलाबाड़ी, लरनी, मैरची एवं लरही को भूमि ही नहीं है।

इन 16 भवन विहीन विद्यालयों के छात्र एवं छात्राएं 2006 से आज तक खुले आसमान के नीचे ही साल के बारहो महीने पढ़ने को मजबूर हैं। भवन विहीन विद्यालयों के शिक्षकों का कहना है कडीईओ व डीपीओ को इन भूमिहीन विद्यालयों की समस्या के समाधान के लिए फुर्सत ही नहीं है।

न तो भवन बनाने के लिए राशि आवंटित करते हैं और न ही इसके लिए भूमि की व्यवस्था कराते हैं। अब ऐसे विद्यालयों को निकटवर्ती विद्यालय में मर्ज किया जा रहा है। ऐसे विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना चलाना भी मुश्किल होता है।

वहीं मुखिया संघ के अध्यक्ष विमलचंद्र खाँ कहते हैं कि शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों ने 16 वर्षों से भूमि एवं भवन से वंचित विद्यालयों की अनदेखी की है। इसके संचालन के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है जिसे देखने वाला कोई नहीं है।

प्रावि नारायणपुर घाट को 9 डिसमिल भूमि, वह भी विवादित

प्राथमिक विद्यालय नारायणपुर घाट में वर्ग 1 से 5वां तक में कुल 100 छात्र नामांकित है। विद्यालय का संचालन सीमेंट से निर्मित 6 खूँटा पर बाँस और प्लास्टिक से बने शेड के नीचे होता है। शेड के चारों ओर घास और कचरा फैला हुआ है।

एचएम भारती कुमारी ने बताया कि विद्यालय के पास 9 डिसमिल भूमि है। किन्तु ग्रामीण राम पुकार यादव द्वारा उस पर अपना दावा आपत्ति दर्ज करने से वह विवादित हो गई है। इसकी स्थापना 2006 में हुई।

मवि मधुबन के एक कमरे में संचालित होता है प्रावि भटवन

प्राथमिक विद्यालय भटवन एक अर्धनिर्मित कमरा में संचालित होता है। इसमें कुल दो शिक्षक एवं वर्ग 1 से 5वां तक में 80 छात्र नामांकित है। विद्यालय को बिना खिड़की किंवाड़ वाला एक कमरा मध्य विद्यालय मधुबन द्वारा मिला हुआ है।

एचएम संजुला कुमारी ने बताया कि विद्यालय के पास भटवन में जमीन प्राप्त है, किन्तु भवन निर्माण नहीं हो सका। इसकी स्थापना 2006 में हुई थी। मूलभूत सुविधा भी नहीं है।

प्रावि मधुबन के 161 बच्चों की एक ही कमरे में होती है पढ़ाई

प्राथमिक विद्यालय मधुबन एक अर्धनिर्मित कमरा में चलता है। इसके वर्ग 1 से 5वां तक में कुल नामांकित छात्रों की संख्या 161 है। एचएम अरविंद कुमार यादव ने बताया कि यह एक कमरा मध्य विद्यालय मधुबन द्वारा मिला है। इसी एक कमरे में सभी वर्ग संचालित होते हैं। स्थापना 2006 में हुई, तब से अब तक विद्यालय के पास न जमीन है और न ही भवन है।

जिन भवनहीन विद्यालयों को भूमि मिल गई है, उसके भवन निर्माण का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। मगर अभी तक राशि आवंटित नहीं की गई है। राशि आवंटित होते ही इन विद्यालयों के भवन का निर्माण कराया जाएगा।

मोहन चौधरी बीईओ
– इंद्र कुमार कर्ण, डीपीओ एसएसएसभी प्रखंडों में स्कूलों के सर्वे का काम चल रहा है। रिपोर्ट आने पर वस्तुस्थिति सामने आएगी। यदि कोई भवनहीन स्कूल है और उसकी जमीन है, तो भवन बनाने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू कराई जाएगी।
– इंद्र कुमार कर्ण, डीपीओ एसएसए

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