जहां चिताएं जलती हैं, वहां जलायी शिक्षा की अलख: मुजफ्फरपुर में लाश पर से बताशा-फल चुनने वाले बच्चे हो रहे साक्षर, 46 बच्चों से शुरू पाठशाला में आज 81 बच्चे हैं

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मुजफ्फरपुर13 मिनट पहले

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श्मशान घाट परिसर में पढ़ाई करते बच्चे।

कहते हैं, मन मे कुछ करने की इच्छा हो तो कोई भी काम आसान हो जाता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया मुजफ्फरपुर के एक एक युवा सुमित कुमार ने। आज शहर ही नहीं देश भर में उनकी पहचान है। लोग उन्हें जानते हैं, पहचानते हैं और सम्मान के साथ देखते हैं। जिस जगह जाने का नाम सुनकर लोगों की रूह कांप जाती हैं, वहां पर सुमित अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर शिक्षा की अलख गरीब बच्चों में जगा रहे हैं। हम बात कर रहे हैं शहर के सिकन्दरपुर स्थित मुक्तिधाम (श्मशान घाट) की। इस इलाके के गरीब परिवार के बच्चे लाश पर से बताशा और फल चुनते थे। लेकिन, आज वे दो दूनी चार पढ़ रहे हैं। यह सब मुमकिन हुआ है जिज्ञासा समाज कल्याण के संस्थापक सुमित की बदौलत।

एक शव जलाने गए तभी बच्चों को देख मिली थी प्रेरणा

सुमित कहते हैं, 2017 में एक परिचित की मौत हो गयी थी। शव का दाह संस्कार करने मुक्तिधाम गए थे। उसी समय देखा कि किस तरह बच्चे लाश पर से बताशा और फल चुन रहे हैं। देखकर उनका दिल पसीज गया। पढ़ने-लिखने और खेलने की उम्र में ये पेट के लिए मारामारी कर रहे थे। यहीं से उनके मन मे जिज्ञासा जगी की क्यों न इन्हें साक्षर बनाया जाए। लेकिन, इन गरीब बच्चों के मां-बाप के पास इतना पैसा कहां था कि बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल भेजते। वे खुद भी साक्षर नहीं थे तो शिक्षा का महत्व क्या समझते।

बच्चों के बीच मिठाईयां बांटते सांसद अजय निषाद।

बच्चों के बीच मिठाईयां बांटते सांसद अजय निषाद।

मन्दिर के पुजारी का मिला सहयोग

मुक्तिधाम में एक महाकाल का मंदिर है। सुमित ने यहां के पुजारी सोखी लाल मंडल से बातचीत की और अपनी इच्छा जाहिर की। वे काफी खुश हुए और आसपास के लोगों को बुलाया। फिर उन्हें सुमित की सोच से अवगत कराया। लोग भी इसके ये तैयार हो गए। बस फिर क्या था एक-एक कर 46 बच्चे जमा हो गए और इन्हें मुफ्त शिक्षा मिलने लगी।
आज 81 हो गई बच्चों की संख्या

इन्हें पढ़ाने के लिए सुमित ने अपने दोस्तों अभिराज कुमार और सुमन सौरभ को भी तैयार कर लिया। बच्चों की संख्या बढ़कर आज 81 हो गयी है। सुमित कहते हैं कोरोना काल मे पढाई तो बन्द है। लेकिन, वे अक्सर बच्चों के घर जाकर उनसे बातचीत करते रहते हैं। कुछ टास्क भी दे देते हैं। फिर उसे देखने भी जाते हैं।

पश्चिम चम्पारण में चला रहे तीन पाठशाला
सुमित बताते हैं मुजफ्फरपुर में लोगों का प्यार और सहयोग देखकर अच्छा लगा। फिर, पश्चिम चम्पारण में भी तीन पाठशाला खोल दी। वहां भी गरीब बस्ती में गरीबों के बीच शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।

सांसद मनाते हैं अपनी शादी की सालगिरह
मुजफ्फरपुर के भाजपा सांसद ने पाठशाला खुलवाने में हर सम्भव मदद की थी। वे स्वयं हर साल अपनी शादी की सालगिरह यहीं पर मनाते हैं। गरीब बच्चों के बीच कपड़े और मिठाईयां भी बांटते हैं।

राष्ट्र गान गाकर करते शुरुआत

इस पाठशाला में बच्चों को पठन-पाठन के साथ देशभक्ति की शिक्षा भी दी जाती है। पाठशाला की शुरुआत राष्ट्र गान गाकर किया जाता है। बच्चों में इससे देशभक्ति का भाव भी जगता है। सुमित कहते हैं, बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार की सीख भी दी जाती है।

(मुजफ्फरपुर से बाबुल दीप सिंह की रिपोर्ट)

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