जहानाबाद की बराबर गुफाएं भी हैं टूरिस्ट डेस्टिनेशन: पहाड़ियों पर पेड़ों के बीच सुंदर हवाएं मोह लेती हैं मन, गुफा में है रोमांचक अनुभव

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जहानाबाद27 मिनट पहले

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खुद में पर्यटन के लिहाज से असीम संभावनाएं संजोए है यह स्थान।

जहानाबाद जिला से 25 किलोमीटर पूरब बराबर पहाड़ी स्थित है। यह हिंदू और बौद्ध धर्म के लिए बहुत ही पवित्र स्थान है। इस पहाड़ी का इतिहास बहुत ही प्राचीन है। इस पहाड़ी के ऊपर भगवान शिव का बहुत ही प्राचीन मंदिर है, जहां प्रत्येक वर्ष श्रावण के महीने में लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव के भक्त बाणासुर नामक राक्षस ने मंदिर को स्थापित करवाया था। यह हिंदू धर्म के लिए सिद्धेश्वरनाथ धाम के रूप में विख्यात है। जब सम्राट अशोक अपनी विजय पताका चारों ओर फैला रहे थे, तो यह स्थान हिंदुओं का पवित्र स्थान था। लेकिन जब सम्राट ने बौद्ध धर्म अपनाया तो बौद्ध धर्म के भिक्षुकों के लिए चट्टानों को काटकर चार गुफाएं कर्ज, चौपाड़, विश्व झोपड़ी, कर्ण बनवाया गया था।

गुफा की आंतरिक सतह पर ध्वनि और प्रकाश के रिफ्लेक्शन का रोमांचक प्रभाव मौजूद है।

गुफा की आंतरिक सतह पर ध्वनि और प्रकाश के रिफ्लेक्शन का रोमांचक प्रभाव मौजूद है।

देश-दुनिया के लिए आकर्षक का केंद्र बन सकती हैं बराबर गुफाएं
यह गुफा पूरी तरह से ग्रेनाइट पॉलिश युक्त है। यह स्थान खुद में पर्यटन के लिहाज से असीम संभावनाएं संजोए है। अर्थव्यवस्था की दृष्टि से सरकार के राजस्व में बहुत बड़ा योगदान हो सकता है। इसकी खूबसूरती देश-दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

यहां अभी भी बड़ी संख्या में पर्यटन आते हैं। लोगों ने बताया कि आने के बाद इस स्थल से जाने का मन नहीं करता। पहाड़ियों पर हरे-हरे पेड़ों के बीच सुंदर हवाएं मन मोह लेती हैं। एक पर्यटक सोनी कुमारी ने बताया कि इस स्थान पर आकर बहुत अच्छा लगा। अगर बिहार सरकार इसे सही ढंग से पर्यटन के लिए विकसित करे तो यहां देश-विदेश के भी पर्यटक आ सकते हैं।

घूमने आई सोनी कुमारी और गुफा में खेलते बच्चे।

घूमने आई सोनी कुमारी और गुफा में खेलते बच्चे।

वाणावर महोत्सव में फिर मिला आश्वासन
जिला प्रशासन एवं पर्यटन विभाग द्वारा हर साल 18 दिसंबर को वाणावर महोत्सव मनाया जाता है। इस बार वाणावर महोत्सव में आए लघु एवं सिंचाई मंत्री संतोष कुमार ने कहा कि इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस अवसर पर दूरदराज से आए हुए कलाकारों ने पहाड़ की तलहटी में अपनी कला का प्रदर्शन भी किया।

(इनपुट: पंकज कुमार)

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