तीसरी लहर से निपटने के लिए कैसी है तैयारी: पटना के 3 अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट चालू, लेकिन कई जिलों में अब भी आधा-अधूरा काम; कहीं पर ऑपरेटर ही नहीं हो सके बहाल

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पटनाएक घंटा पहले

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पीएमसीएच में नया लगा ऑक्सीजन प्लांट।

पटना के तीन बड़े अस्पतालों पीएमसीएच, एनएमसीएच और आईजीआईएमएस में 80 हजार किलो लीटर की क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट चालू कर दिए गए हैं। मरीजों को इसका लाभ भी मिलने लगा है, लेकिन इस बीच राज्य के अधिकांश जिलों में अभी ऑक्सीजन प्लांट चालू नहीं किए जा सके हैं। अभी तैयारी आधी अधूरी है। कहीं पाइपलाइन नहीं बिछा है, तो कहीं ऑपरेटर की कमी के कारण इसे चालू नहीं किया जा सका है। कई जगहों पर पाइप से लीकेज की भी शिकायत है।

देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट और राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच दैनिक भास्कर ने अस्पतालों में स्थापित होने वाले ऑक्सीजन प्लांट की वस्तुस्थिति की पड़ताल की। गौरतलब है कि दूसरी लहर में अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के कारण होने वाली परेशानी को देखते हुए राज्य भर के जिला और सदर अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन आठ माह बीत जाने के बाद भी अभी तैयारी पूरी नहीं हो सकी है।

भागलपुर : प्लांट बनकर तैयार, लेकिन नहीं हो सका चालू
भागलपुर के मायागंज में प्लांट बनकर तैयार है। ट्रायल हो चुका है पर अबतक चालू नहीं हो पाया है। सदर अस्पताल में भी प्लांट लग गया है पर कुछ कमी है। कहलगांव में ट्रायल हो चुका है। नवगछिया में प्लांट का काम अधूरा है। अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ. अरुण कुमार ने बताया कि 500 लीटर क्षमता वाले प्लांट का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। सभी 30 बेडों पर ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए पाइप बिछाई गई है। लेकिन, अभी तक प्लांट चालू करने के लिए पटना से सिलेंडर नहीं आए हैं।

सिलेंडर आने के बाद ऑक्सीजन प्लांट चालू कर दिया जाएगा। औरंगाबाद के सदर अस्पताल में दो ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं। जिसमें एक 1000 पीएमएफ प्रति मिनट ऑक्सीजन सप्लाई करने वाला प्लांट तकनीकी कारण के कारण अब तक शुरू नहीं हो पाया है। छपरा के मढ़ौरा में ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण अंतिम चरण में है। 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है। मशीन इस्टॉल नहीं हुआ है। पाइपलाइन बिछाई जा रही है। ट्रांसफाॅर्मर की डिमांड की गई है। विभाग का दावा है कि दिसंबर के आखिर तक शुभारंभ होगा।

कैमूर : तकनीकी खामी से यूनिट नहीं कर रही काम
कैमूर में सदर अस्पताल भभुआ, अनुमंडलीय अस्पताल मोहनिया और रेफरल अस्पताल रामगढ़ में ऑक्सीजन यूनिट लगाई जा रही है। दावा रामगढ़ में यूनिट शुरू किए जाने किए जाने का है, लेकिन सदर अस्पताल भभुआ और रेफरल अस्पताल मोहनिया में तकनीकी खामी से यूनिट फंक्शनल नहीं हो सकी है। सीवान में पीएम केयर्स फंड से सदर अस्पताल तथा महाराजगंज अनुमंडलीय अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना की गई है। उद्घाटन के बावजूद अभी ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो रही है।

नालंदा : किसी अस्पताल में टेक्नीशियन ही नहीं
बिहारशरीफ के सदर अस्पताल के अलावा हिलसा, राजगीर अनुमंडीय अस्पताल एवं कल्याण बिगहा रेफरल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट स्थपित कर दिया गया है। लेकिन, कहीं भी टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं की गई है। टेक्नीशियन के अभाव में कल्याण बिगहा और हिलसा में प्लांट का संचालन नहीं हो रहा है। वहीं सदर अस्पताल एवं राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था कर प्लांट का संचालन किया जा रहा है।

जहानाबाद : दो महीने पहले उद्धाटन, ऑपरेटर बहाल नहीं
जहानाबाद में दो महीने पहले ऑक्सीजन प्लांट का उद्घाटन हुआ था। लेकिन, अब तक ऑपरेटर की कमी से चालू नहीं किया जा सका है। इसकी क्षमता एक मिनट में 500 लीटर उत्पादन की है। बक्सर जिला मुख्यालय और डुमराव में एक-एक प्लांट अभी बंद है, क्योकि कम्प्रेशर में फाॅल्ट है। हालांकि, डीपीएम संतोष कुमार ने बताया कि इस सप्ताह में दोनों का कम्प्रेशर ठीक कर चालू कर दिया जाएगा। नवादा में भी दोनों प्लांट तैयार है, लेकिन सप्लाई शुरू नहीं हुई है। क्योंकि, ऑपरेटर नहीं हैं। सुपौल के सदर अस्पताल में प्लांट तैयार है, लेकिन पाइपलाइन का काम अभी पूरा नहीं हो सका है।

जिस वजह से ऑक्सीजन सप्लाई चालू नहीं हुई है। लखीसराय सदर अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट बनकर तैयार है। इसकी क्षमता 500 लीटर प्रति मिनट है। अस्पताल के बेडों एवं एसएनसीयू में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इसलिए, अभी तक प्लांट काे चालू नहीं किया गया है। लखीसराय जिले में एकमात्र सदर अस्पताल में ही ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। खगड़िया के अस्पताल के बेडों एवं एसएनसीयू में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाया जा चुका है, लेकिन अभी इसे काे चालू नहीं किया जा सका है।

समस्तीपुर में चालू किया गया प्लांट
समस्तीपुर के सदर अस्पताल में 1000 किलोग्राम की क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण किया जा चुका है। सिविल सर्जन सत्येंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि दलसिंहसराय, पूसा, पटोरी व रोसड़ा अनुमंडलीय अस्पताल में 250 से 500 किग्रा वाले ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। दरभंगा के डीएमसीएच में भी प्लांट बन कर तैयार है। मरीजों की अधिकता होते ही इसे चालू कर दिया जाएगा। डीएमसीएच अधीक्षक डॉक्टर हरिशंकर मिश्रा ने कहा कि सभी प्लांट बनकर तैयार हैं। कोरोना मरीज आने पर कभी भी चालू किया जा सकता है।

बेतिया के जीएमसीएच में चार व नरकटियागंज व बगहा अनुमंडलीय अस्पताल दो-दो ऑक्सीजन प्लांट बनकर तैयार हो गए हैं। जीएमसीएच परिसर में 1000 एलपीएम क्षमता वाले प्लांट को शुरू किया गया है। जहां प्रति प्लांट से प्रति मिनट 1000–1000 लीटर ऑक्सीजन उत्पादन की है क्षमता है। अनुमंडलीय अस्पताल नरकटियागंज व बगहा में 2000 एलपीएम क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट से उत्पादन शुरू हो गया है।

मधुबनी में 1000 एलएमपी वाला प्लांट
सिविल सर्जन डॉ. वीरेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया कि कोरोना की तीसरे लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार है। अनुमंडलीय अस्पतालों से लेकर पीएचसी तक में तैयारी की गई है। मधुबनी के सदर अस्पताल में एक हजार एलपीएम ऑक्सीजन पैदा करने वाला प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। साथ ही अनुमंडलीय अस्पताल जयनगर में 500 एलपीएम, फुलपरास में 400 एलपीएम, झंझारपुर में 400 एलपीएम, अररिया संग्राम में 300 एलपीएम प्लांट की स्थापना की गयी है। सदर अस्पताल और फुलपरास अनुमंडल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट का काम पूरा हो चुका है।

वहीं, झंझारपुर और जयनगर अनुमंडल के अंतर्गत इसका निर्माण अंतिम चरण में है। सीतामढ़ी जिले में तीन ऑक्सीज प्लांट बनकर तैयार है। सदर अस्पताल सीतामढ़ी में दो और बेलसंड अनुमंडल अस्पताल में एक ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया है। पूर्णिया में राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के साथ-साथ धमदाहा व बनमनखी अनुमंडलीय अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। जिले में तीनों जगह ऑक्सीजन प्लांट निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। मेडिकल कॉलेज में दो नए ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं,जिसकी क्षमता 1000 लीटर प्रति मिनट है। इससे प्रतिदिन 2000 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन मिलेगी।

तीसरी लहर की संभावना के बीच स्वास्थ्य विभाग रहे सचेत

  • तीसरी लहर की संभावना के बीच स्वास्थ्य विभाग काे पहले से सचेत हो जाने की जरूरत है। ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने का काम सभी जिलों में लगभग पूरा हो गया है। छोटी-मोटी कमी के कारण अगर इसे शुरू नहीं किया गया है, तो तुरंत चालू कर देना चाहिए। – डाॅ. अजय कुमार, अध्यक्ष, आईएम, बिहार

ऑक्सीजन को लेकर पैनिक वाली स्थिति नहीं होनी चाहिए

  • ऑक्सीजन को लेकर पैनिक होने की स्थिति नहीं होनी चाहिए। विदेश में अब तक का जो ट्रेंड रहा है, उसमें ओमिक्रॉन से पीड़ित मरीजों को ऑक्सीजन या अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत न के बराबर है। वैसे स्वास्थ्य विभाग अपनी तैयारी पूरी करने में लगा है। – डाॅ. सहजानंद सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईएमए

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