दाखिल खारिज को लेकर नए नियम की तैयारी: म्यूटेशन का काम CO से लेकर राजस्व अधिकारी को देने पर विचार कर रही बिहार सरकार

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पटना11 मिनट पहले

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जमीनी बातें सीजन-2 का आयोजन नई दिल्ली में 30 और 31 अक्टूबर को होगा।

राजधानी पटना के गांधी मैदान स्थित होटल मौर्य में आज राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा आयोजित ’जमीनी बातें’ कार्यशाला के दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन हुआ। समापन भाषण में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि वह आम लोगों की उम्मीदों पर पूरी तरह से खरा उतरे। किसी भी रैंकिंग में ऊपर जाने से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि हम बिहार के लोगों की आकांक्षाओं पर कितना खरा उतरते हैं और उनकी परेशानी को किस हद तक दूर कर पाते हैं। दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले बिहारियों को विभाग द्वारा शुरू की गई नई ऑनलाइन सेवाओं के बारे में जानकारी देने और बिहार में चल रहे सर्वे कार्य में उनकी भागीदारी बढ़ाने के मकसद से ‘जमीनी बातें सीजन-2’ का आयोजन नई दिल्ली में किया जा रहा है। यह आयोजन 30 और 31 अक्टूबर को द्वारका में बने नवनिर्मित बिहार सदन में किया जाएगा।

अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारी को एक दूसरे का पूरक बनाया जाए

अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने उन क्षेत्रों की ओर इशारा किया, जिसमें मध्य प्रदेश के राजस्व विभाग की टीम अच्छा काम कर रही है और जिनसे बिहार को सीखना है। मध्यप्रदेश में जैसे तहसीलदार और नायब तहसीलदार राजस्व का काम करते हैं. उसी तरह बिहार में अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारी को एक दूसरे का पूरक बनाया जाएगा। विभाग इस बात पर विचार करेगा कि दाखिल खारिज का काम अंचल अधिकारी से लेकर राजस्व अधिकारी को दे दिया जाए। फिलहाल बिहार में राजस्व अधिकारियों को जाति, आवास और आय के प्रमाण पत्र निर्गत करने का अधिकार दिया गया है।

मध्य प्रदेश में नायब तहसीलदार, तहसीलदार और अतिरिक्त तहसीलदार का पद है जो म्यूटेशन के अलावा विवादित बंटवारा का काम देखता है। वहां विवादित बंटवारा के बारे में 6 महीने में फैसला देने का नियम है जिसके खिलाफ अपील के लिए एसडीओ कोर्ट, कलेक्टर का कोर्ट और आयुक्त का कोर्ट है। यहां बंटवारा में विवाद होने पर निर्णय देने का अधिकार बीएलडीआर एक्ट में भूमि सुधार उप समाहर्ता को दिया गया है।

अधिकारियों का एक कैडर मध्य प्रदेश की तरह

इस पर भी विचार होगा कि जैसे मध्य प्रदेश में ग्राम पटेल/कोटवार से लेकर डिप्टी कमिश्नर लैंड रिकॉर्डस तक अधिकारियों का एक कैडर है, वैसा अपने यहां कैसे खड़ा किया जाए। फिलहाल बिहार में डायरेक्टर लैंड रिकॉर्डस से नीचे कोई सुव्यवस्थित कैडर नहीं है। सर्वे के समय जरूर बंदोबस्त पदाधिकारी, सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी आदि की तैनाती की जाती है। आम दिनों में लैंड रिकॉर्ड्स को लगातार अपडेट करने की समानांतर व्यवस्था यहां नहीं है। मध्यप्रदेश के ब्लॉक चेन की बिहार में कोई उपयोगिता है या नहीं, विभाग इस पर भी विचार करेगा।

अभी भी ढेरों क्लॉज इस्ट इंडिया कंपनी की जरूरत के हिसाब से

कार्यशाला में यह भी निष्कर्ष निकला कि बिहार में राजस्व संबंधी नियम-कानून मुख्यतः अंग्रेजों के जमाने के बी.टी. एक्ट पर आधारित हैं। हालांकि उसमें बहुत संशोधन हुए हैं, किन्तु अभी भी उसके ढेर सारे क्लॉज इस्ट इंडिया कंपनी की जरूरत के हिसाब से लिखे गए हैं। आज की जरूरत के मद्देनजर बिहार में एक मास्टर एक्ट बनाए जाने की जरुरत है, जिसमें राजस्व संबंधी सभी नियम, उपनियम एक जगह संकलित किए जाएं। इसे मध्य प्रदेश के 1959 में बने कानून MADHYA PRADESH LAND REVENUE CODE (MPLRC) की तर्ज पर कार्यान्वित किया जाए।

आई.आई.टी रूड़की की टीम ने दिया प्रजेंटेशन

कार्यशाला में आई.आई.टी., रूडकी की टीम द्वारा स्पेशियल म्यूटेशन पर प्रेजेंटशन दिया गया। आई.आई.टी, रूड़की के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो. कमल जैन से अनुरोध किया गया कि वो इस काम में आनेवाली तकनीकी बाधाओं का जल्द से जल्द दूर कर लें, ताकि इस सुविधा को शीघ्र शुरू किया जा सके। मध्यप्रदेश की टीम ने अपने राज्य में स्पेशियल म्यूटेशन शुरू करने की इच्छा भी जताई।

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