धूप में खुली पड़ी रही कोरोना पॉजिटिव डेडबॉडी: इलाज प्रधान सचिव देख गए, मौत का हाल दिखा रहा भास्कर- “मायागंज से डेडबॉडी रात 9 बजे उठेगी”

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भागलपुर7 घंटे पहलेलेखक: कृष्ण बल्लभ नारायण

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  • भास्कर रिपोर्टर ने सोमवार दोपहर 3 बजे से मंगलवार दोपहर 3 बजे तक देखा हाल

कोरोना पॉजिटिव की लाश कोविड प्रोटोकॉल के तहत जलाने का नियम तो पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में भी टूट रहा है, लेकिन भागलपुर का जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JLNMCH) दो कदम और आगे है। स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत मरीजों का हाल जो देखकर गए, उससे आगे दैनिक भास्कर लाशों से कुकृत्य दिखा रहा है। यहां कोरोना पॉजिटिव मृतकों की लाशों को ले जाने के लिए अस्पताल प्रबंधन रात 9 बजे शव-वाहन देने की बात कहता है, लेकिन वह भी नहीं देता है। मरीज अस्पताल में भले डेढ़ घंटे में मर गया हो, लाश 6 घंटे बाद ही उठेगी। एक दिन ही यह नहीं होता है। अगली तारीख को तो आधी रात के बाद 2 बजे मरने वालों को भी अगली रात 9 बजे के लिए इसी तरह का भरोसा दिलाया जाता है। भास्कर रिपोर्टर ने सोमवार दोपहर 3 बजे से मंगलवार दोपहर 3 बजे तक जो देखा, वह सिस्टम की हकीकत सामने लाने के लिए काफी है।

12 अप्रैल 2021
मौत के बाद शव पैक तक नहीं किया, 6 घंटे इंतजार कराया

बांका जिले के अमरपुर थाना क्षेत्र के शाहपुर निवासी 66 वर्षीय राम शर्मा को उनके बेटे सोमवार दोपहर बाद करीब 1:30 बजे मायागंज अस्पताल के कोविड सेक्शन में लेकर आए। करीब डेढ़ घंटे बाद 2:56 पर उनकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने कोरोना पॉजिटिव मृतक की डेडबॉडी खुले में एक चादर डालकर छोड़ दी। प्रक्रिया के तहत शव को पैक कर परिजनों को देना था। बात यहीं खत्म हो जाती तो गनीमत थी। परिजनों को कहा गया कि एंबुलेंस रात 9 बजे के बाद मुहैया कराया जाएगा। आप बरारी स्थित श्मशान घाट में शव का अंतिम संस्कार कर लीजिएगा। परिजन इस मेहरबानी के गवाह बनने के लिए भी दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक बैठे रहे।

रात 9 बजे तक तो स्ट्रेचर भी हटा लिया गया था।

रात 9 बजे तक तो स्ट्रेचर भी हटा लिया गया था।

रात 9 बजे एंबुलेंस की मांग करने पर कर्मियों ने साफ तौर पर मना कर दिया। इसके वीडियो भास्कर के पास मौजूद हैं कि उस वक्त मायागंज अस्पताल कैंपस में एक नहीं बल्कि दो एंबुलेंस खड़ी थीं।

खैर, अब फजीहत के दूसरे चरण की कहानी की ओर बढ़ते हैं। थक-हार कर परिजन 1500 रुपए में टेम्पो भाड़ा कर खुद शव लेकर बरारी घाट गए। परिजनों ने बताया कि टेम्पो चालक को 1500 रुपए देने के बाद श्मशान घाट में इलेक्ट्रिक मशीन पर जलाने के नाम पर 1000 रुपए, आग देने के नाम पर डोम ने 3200 रुपए और चचरी के नाम पर 600 रुपए लिए गए। यानी सोमवार की रात कुल 6300 रुपए खर्च होने के बाद मंगलवार की सुबह 3 बजे अंतिम संस्कार कर पाए।

आखिर, टेम्पो भाड़ा कर शव को ले जाते परिजन।

आखिर, टेम्पो भाड़ा कर शव को ले जाते परिजन।

परिजनों को रात 9 बजे भी एंबुलेंस नहीं मिलने की स्थिति में भास्कर रिपोर्टर ने मायागंज अस्पताल अधीक्षक डॉ असीम कुमार दास के नंबर 9470003121 पर तीन बार फोन किया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा।

13 अप्रैल 2021
रात में मौत, दोपहर तक इंतजार-मिन्नत के बाद मिली एंबुलेंस

रविवार 11 अप्रैल की शाम जमुई के जितौर निवासी कोरोना पॉजिटिव 82 वर्षीय चंपा देवी को मायागंज अस्पताल के कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया। पहले तो पीपीई किट पहने कर्मियों ने एंबुलेंस से उस मरीज को उतारने से मना कर दिया। परिजनों ने ही बुजुर्ग महिला को एंबुलेंस से उतार गोद मे लेकर स्ट्रेचर तक पहुंचाया। इसकी तस्वीर सिर्फ और सिर्फ भास्कर के पास है। मंगलवार की अहले सुबह उनकी भी मौत हो गई।

बुजुर्ग महिला को कंधे पर उठाकर स्ट्रेचर तक ले गए परिजन। PPE किट पहने कर्मी खड़े ही रहे।

बुजुर्ग महिला को कंधे पर उठाकर स्ट्रेचर तक ले गए परिजन। PPE किट पहने कर्मी खड़े ही रहे।

इस बुजुर्ग महिला को भी अस्पताल के कर्मियों ने पहले एंबुलेंस देने से मना कर दिया। यहां भी वही बात दुहराई गई – एंबुलेंस रात 9 बजे के बाद दिया जाएगा। हालांकि इस मरीज को थोड़ी देर बाद ही एंबुलेंस मिल गई। लेकिन परिजनों के अनुसार अस्पताल ने इलाज में लापरवाही बरती। सही समय पर ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया गया। ऐसा किया जाता तो महिला की जान बच जाती।

हालांकि इस बार भी परिजनों को शव के अंतिम संस्कार में हजारों रुपए खर्च करने पड़े। बरारी घाट पर मशीन में जलाने के नाम पर मनमाने तरीके से 1000 रुपए लिए गए। फिर डोम राजा और अन्य खर्च करना ही पड़ा।

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