नंबर 2 के लिए कुछ भी करते हैं नीतीश: RCP पहुंचे मोदी टीम में तो JDU में नंबर 2 की कुर्सी पर कई की नजर, नीतीश कुमार ने जिसे भी नंबर 2 की कुर्सी दी, उसे फर्श से अर्श तक पहुंचाया

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पटना30 मिनट पहलेलेखक: बृजम पांडेय

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CM नीतीश कुमार। (फाइल फोटो)

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह का केंद्र में मंत्री बन जाने के बाद बिहार में नंबर दो की कुर्सी खाली हो गई है। यह नंबर दो की कुर्सी वह है जो नीतीश कुमार के आजू-बाजू रहती है यानी कि नीतीश कुमार का जो विश्वासी होता है। वही नंबर दो की कुर्सी पर बैठता है। नंबर एक की कुर्सी पर तो सीएम नीतीश कुमार खुद बैठे हुए हैं। नंबर दो की कुर्सी वाले आरसीपी सिंह केंद्र में मंत्री बनकर दिल्ली जा चुके हैं।

अब JDU नेताओं ने नंबर दो की कुर्सी पर बैठने की दौर शुरू हो चुकी है। इस फेहरिस्त में कई नेता हैं, जो अपने आप को नीतीश कुमार के लिए समर्पित और ईमानदार बताते हैं। बताते चलें कि इस नंबर दो कि कुर्सी पर बैठने वाला व्यक्ति ही JDU का सर्वोसर्वा होगा यानी कि राष्ट्रीय अध्यक्ष होगा। उसके लिए कुछ नामों पर चर्चा काफी तेजी से चल रही है।

उपेंद्र कुशवाहा

उपेंद्र कुशवाहा JDU में तीसरी बार वापस आए हैं। पहली बार समता पार्टी के समय नीतीश कुमार ने उन्हें विपक्ष के नेता तक पहुंचा दिया था। फिर उन्होंने JDU छोड़ दिया कुछ सालों तक वह इधर-उधर रहे। फिर नीतीश कुमार के पास गए तो, नीतीश कुमार ने उन्हें राज्यसभा सांसद बना दिया था। लेकिन, कुछ ही दिनों के बाद सांसद पद से इस्तीफा देकर उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी RLSP बना ली। RLSP में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया था।

तीन सांसदों को जीता कर दिल्ली ले गए थे और खुद केंद्र में मंत्री बने थे। लेकिन, 2019 लोकसभा चुनाव और 2020 विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा पूरी तरह से पिट गए। फिर, उन्होंने नीतीश कुमार के शरण में आना उचित समझा। नीतीश कुमार ने बड़े ही आदर के साथ उन्हें पार्टी में संसदीय बोर्ड का चेयरमैन बनाया और कुछ ही दिनों के बाद उन्हीं MLC बना दिया। उपेंद्र कुशवाहा के बारे में कहा जाता है कि नीतीश कुमार के वह बेहद करीबी नेता नेताओं में से एक हैं। नीतीश कुमार उन्हें नंबर दो की कुर्सी पर बैठा सकते है।

राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह

मुंगेर के सांसद ललन सिंह नीतीश कुमार के संघर्ष की दिनों के साथी रहे हैं। नीतीश कुमार के साथ उन्होंने राजनीति का ककहरा सीखा और आगे बढ़ते गए। हालांकि नीतीश कुमार का सामाजिक समीकरण और नीतीश कुमार का राजनीति के प्रति समर्पण उनको आगे तक ले गया। ललन सिंह नीतीश कुमार के साथ साए की तरह रहे। ललन सिंह ने भी पूरे समर्पण के साथ नीतीश कुमार का साथ दिया।

बीच के दिनों में कुछ सालों के लिए ललन सिंह नाराज जरूर हुए थे। लेकिन बाद में नीतीश कुमार ने ललन सिंह को मना लिया था और उन्हें MLC बनाकर बिहार सरकार में मंत्री भी बनाया था। बाद में ललन सिंह मुंगेर से सांसद बन गए। ललन सिंह JDU के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। ललन सिंह के पास संगठन चलाने का पूरा अनुभव है। नीतीश कुमार के विश्वासपात्र में से एक ललन सिंह नीतीश कुमार के लिए कुछ भी त्याग सकते हैं। हाल ही में जब केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तो, वरिष्ठ नेता होते हुए भी ललन सिंह ने कैबिनेट के लिए जिद नहीं की। ऐसे में नीतीश कुमार ललन सिंह को नंबर दो की कुर्सी दे सकते हैं।

अशोक चौधरी

अशोक चौधरी भले JDU में नए-नए आए हो। लेकिन, नीतीश कुमार के खासमखास बन गए हैं। पढ़े लिखे और युवा नेता के तौर पर अशोक चौधरी शुमार हैं। वहीं अशोक चौधरी का जातीय समीकरण भी उनको सब से अलग करता है। नीतीश कुमार के इशारे पर अशोक चौधरी ने विधान परिषद में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए पार्टी को तोड़ दिया था। बीच के कुछ महीनों तक अशोक चौधरी जेडीयू के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

कांग्रेस में वह प्रदेश अध्यक्ष रह चुके थे, अशोक चौधरी के पास संगठन चलाने का पूरा अनुभव है। ऐसे में नीतीश कुमार के लिए अशोक चौधरी भी एक ऑप्शन के तौर पर हैं। जिन्हें नीतीश कुमार नंबर दो की कुर्सी दे सकते हैं। हालांकि, अशोक चौधरी अभी बिहार सरकार भवन निर्माण मंत्री हैं। ऐसे में एक व्यक्ति एक पद के मुताबिक यदि अशोक चौधरी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो उन्हें मंत्री पद त्यागना होगा।

नंबर 2 के लिए कुछ भी करते हैं नीतीश

बिहार के सियासी गलियारों में यह कहा जाता है कि नीतीश कुमार जिसे नंबर दो कि कुर्सी देते हैं, उसके लिए कुछ भी कर गुजरते हैं। बात आरसीपी सिंह की करें तो आरसीपी सिंह यूपी कैडर के IAS हुआ करते थे। हालांकि वह बिहार से ताल्लुक रखते थे, बिहार में भी वह नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा से ताल्लुक रखते थे। ऐसे में नीतीश कुमार जब केंद्र में मंत्री थे, तो आरसीपी सिंह उनके OSD बने थे। तब से लेकर अब तक आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के साथ रहे है। यह साथ 23 सालों का रहा है। इन 23 सालों में आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के लिए पूरी तरह से समर्पित दिखे।

RCP की जिद को नीतीश ने किया पूरा

2010 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पंडितों ने नीतीश कुमार के सरकार की विदाई की बात कही थी, उस नाजुक दौर में नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को राज्यसभा सांसद बनाया था। कहा जाता है कि नीतीश कुमार के सामने आरसीपी सिंह ने जिद्द की थी। एक बार राज्यसभा सांसद बनाने की बात हो तो समझ में आती है। आरसीपी सिंह को नीतीश कुमार ने दोबारा भी राज्यसभा भेजा। यहां तक कि आरसीपी सिंह संगठन में ऐसे घुसे कि नीतीश कुमार ने अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष पद त्याग कर आरसीपी सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद दे दिया। इसके बाद भी नीतीश कुमार ने जब केंद्रीय मंत्रिमंडल के लिए एक कैबिनेट मंत्री का ऑफर आया तो आरसीपी सिंह को उन्होंने आगे बढ़ा दिया कि वह फैसला लेंगे कि केंद्र में कौन मंत्री बनेगा। आरसीपी सिंह आज केंद्र में मंत्री हैं।

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