नीति आयोग की रिपोर्ट: 7 इंडेक्स में बिहार की देश में सबसे खराब स्थिति, 51.91% जनसंख्या मल्टीडाइमेंशनली गरीब

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पटना10 मिनट पहले

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गरीबी , न्यूट्रिशन, मैटरनल हेल्थ, स्कूल अटेंडेस, इलेक्ट्रिसिटी कुकिंग और फ्यूल के मामले में बिहार देश में सबसे नीचे।

नीति आयोग ने बुधवार को नेशनल मल्टीडाइमेंशनल पोवर्टी इंडेक्स- बेसलाइन रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार बिहार के 51.91 प्रतिशत जनसंख्या मल्टीडाइमेंशनली गरीब हैं, जबकि 51.88 प्रतिशत लोग न्यूट्रिशन से वंचित हैं। गरीबी , न्यूट्रिशन, मैटरनल हेल्थ, स्कूल अटेंडेस, कुकिंग फ्यूल व इलेक्ट्रिसिटी के मामले में बिहार का स्थान देशभर में सबसे ज्यादा खराब है। नीति आयोग ने स्पष्ट किया है कि एनएफएचएस 4 के आंकड़ों पर यह आकलन किया गया है।

नीति आयोग ने कहा है कि ये विवरण राष्ट्रीय नीतियों का मार्गदर्शन और निगरानी कर सकते हैं जैसे कि बजट आवंटन, सभी क्षेत्रों में नीति समन्वय इत्यादि, इसी उद्देश्य से यह रिपोर्ट जारी की गई है। बिहार का मल्टीडाइमेंशनल पोवर्टी इंडेक्स 0.265 है। 51.91 प्रतिशत पॉपुलेशन गरीब, 51.88 प्रतिशत न्यूट्रिशन से वंचित, 45.62 प्रतिशत मैटरनल हेल्थ से वंचित बिहार में 51.91 प्रतिशत जनसंख्या गरीब है। देश के सभी राज्यों में केरल की स्थिति सबसे अच्छी है, यहां के 0.71 प्रतिशत लोग ही गरीब हैं। बिहार के बाद सबसे खराब स्थिति में झारखंड है, यहां के 42.16 प्रतिशत लोग मल्टीडाइमेंशली गरीब की कैटेगरी में हैं।

जबकि उत्तर प्रदेश में 37.79 प्रतिशत लोग गरीब हैं। वहीं बिहार में 51.88 प्रतिशत जनसंख्या न्यूट्रिशन से वंचित है। यह भी देश में सबसे अधिक है। झारखंड में 47.99 प्रतिशत लोग न्यूट्रिशन से वंचित है, मध्य प्रदेश में 45.49 प्रतिशत लोग वंचित हैं। राज्य में सबसे अच्छी स्थिति सिक्किम की है, यहां सिर्फ 13.32 प्रतिशत लोग ही न्यूट्रिशन से वंचित हैं। एक परिवार को न्यूट्रिशन से वंचित माना जाता है यदि 0 से 59 महीने की उम्र के बीच का कोई बच्चा, या 15 से 49 साल की उम्र के बीच की महिला,या 15 से 54 वर्ष की आयु के बीच का व्यक्ति कुपोषित पाया जाता है।

बिहार की 45.62 प्रतिशत आबादी मैटरनल हेल्थ से वंचित है। एक परिवार वंचित माना जाता है यदि घर में कोई महिला जिसने 5 वर्षों में किसी बच्चे को जन्म दिया है, तथा कम से कम 4 प्रसवपूर्व देखभाल नहीं मिली है या हाल ही में बच्चे के जन्म के दौरान प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों से सहायता नहीं मिली है। बिहार के बाद सबसे खराब स्थिति उत्तर प्रदेश की है यहां 35.45 प्रतिशत महिलाएं मैटरनल हेल्थ से वंचित हैं। सबसे अच्छी स्थिति केरल की है यहां 1.73 प्रतिशत महिलाएं ही मैटरनल हेल्थ से वंचित हैं।

मल्टी डाइमेंशनल पोवर्टी इंडेक्स में मुख्यत: तीन डाइमेंशन पर आकलन किया गया है, स्वास्थ्य, शिक्षा व स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग। स्वास्थ्य के इंडीकेटर में न्यूट्रिशन, चाइल्ड मॉर्टेलिटी, तथा मैटर्नल केयर है। जबकि शिक्षा के इंडीकेटर में स्कूलिंग वर्ष व स्कूल अटेंडेस है। सबसे अधिक स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग के इंडीकेटर्स हैं जिसमें कुकिंग फ्युल, सैनिटेशन, ड्रिंकिंग वाटर, इलेक्ट्रिसिटी, हाउसिंग, असेट्स तथा बैंक अकाउंट है। बिहार की स्थिति इन 12 सूचकांकों में 7 में खराब है। गरीबी , न्यूट्रिशन, मैटरनल हेल्थ, स्कूल अटेंडेस, कुकिंग फ्यूल व इलेक्ट्रिसिटी के मामले में बिहार का स्थान देशभर में सबसे ज्यादा खराब है। सबसे अच्छी स्थिति ड्रिंकिंग वाटर के मामले में है, बिहार के सिर्फ 2.34 प्रतिशत लोग ही स्वच्छ पानी से वंचित हैं। देश में बिहार का स्थान दूसरा है, सबसे ऊपर पंजाब है।

शिक्षा- 26.27% बच्चों की स्कूली शिक्षा पूरी नहीं, 8 तक स्कूल नहीं गए 12.52%
एक परिवार तब तक स्कूली शिक्षा से वंचित माना जाता है जबतक 10 साल या उससे अधिक उम्र के परिवार के एक सदस्य ने छह साल की स्कूली शिक्षा पूरी नहीं की हो। बिहार के ऐसे 26.27% बच्चे हैं जिन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी नहीं की है। यह देश में सर्वाधिक है। सबसे अच्छी स्थिति केरल की है यहां के 1.78% बच्चे ही स्कूली शिक्षा से वंचित हैं। बिहार के 12.52% बच्चे कक्षा 8 तक स्कूल नहीं गए हैं।

नीति आयोग की परिभाषा के अनुसार यदि कोई स्कूली आयु वर्ग का बच्चा उस उम्र तक स्कूल नहीं जा रहा है जिस पर वह कक्षा 8 पूरा करेगा तो उसे स्कूल अटेंडेंस से वंचित माना जाता है। 12.52% नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के आंकड़ों पर आकलन किया गया है, एनएफएचएस-5 के प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार बिहार में ऐसे 9.80% बच्चे हैं यह भी देश में सर्वाधिक है।

63.20% आबादी खाना बनाने के लिए पारंपरिक इंधनों पर निर्भर
बिहार में 63.20 प्रतिशत आबादी पारंपरिक इंधरों पर निर्भर है। यानि लोग उपले, लकड़ी, चारकोल या कोयले पर खाना बना रहे हैं। यह देश के सभी राज्यों के मुकाबले ज्यादा है। सबसे अच्छी स्थिति गोवा की है यहां की सिर्फ 3.10 प्रतिशत आबादी ही पारंपरिक इंधनों पर निर्भर है। हालांकि एनएफएचएस 4 में बिहार की 82.92 प्रतिशत आबादी खाना बनाने के लिए पारंपरिक इंधनों पर निर्भर थी।

अन्य सूचकांकों पर बिहार की स्थिति

  • सैनिटेशन- 73.61 प्रतिशत वंचित, सबसे खराब स्थिति वाले राज्यों में दूसरे नंबर पर, एनएफएचएस 5 के आंकड़ों के अनुसार 50.60 प्रतिशत वंचित
  • ड्रिंकिंग वाटर- 2.34 प्रतिशत वंचित, सबसे अच्छी स्थिति वाले राज्यों में दूसरे नंबर पर
  • इलेक्ट्रिसिटी- 39.86 प्रतिशत घर वंचित, एनएफएचएस-4 के अनुसार) एनएफएचएस- 5 के प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार 3.70 प्रतिशत घर वंचित
  • हाउसिंग- 73.73 प्रतिशत घर से वंचित, एनएफएचएस 5 के अनुसार 65.30 प्रतिशत
  • संपत्ति- 24.32 प्रतिशत लोगों के घरों में एक या एक से अधिक टीवी, फ्रिज, कंप्यूटर, टेलिफोन, साइकिल, मोटरसाइकिल नहीं।
  • बैंक अकाउंट- 26% लोगों के पास बैंक अकाउंट नहीं, एनएफएचएस 5 के प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार बिहार के 4 % के पास अकाउंट नहीं है।

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