नीतीश ने तेजस्वी का बढ़ाया कद: जातीय जनगणना पर नीतीश ने मीटिंग का श्रेय तेजस्वी को दिया, अब इसके निकाले जा रहे हैं कई सियासी संकेत

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पटनाएक घंटा पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद

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पीएमओ कार्यालय के बाहर सीएम नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव।

बिहार की 10 राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों ने सोमवार को PM नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में इस पहल का सारा क्रेडिट नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को दे दिया। उन्होंने कहा- ‘यही (तेजस्वी) यह प्रस्ताव लेकर आए थे कि सभी पार्टियों के प्रतिनिधियों को पीएम से समय लेकर मिलना चाहिए। इसके बाद हमलोग पीएम से मुलाकात के लिए आए।’ CM के इस बयान का बिहार में लोग तरह-तरह के मायने निकाल रहे हैं।

सियासी जानकारों का कहना है- ‘ जातीय जनगणना कराने की मांग वाली लड़ाई सीधे-सीध पिछड़ा-अतिपिछड़ा, दलित और मुसलमानों के वोट बैंक से जुड़ी है। बिहार में इससे जुड़ी जातियों का वोट बैंक सर्वाधिक है। सत्ता पर वही पार्टी काबिज होती है या सबसे बड़ी पार्टी वही होती है, जिसके पास इन जातियों से जुड़े लोग वोट करते हैं। इसलिए तेजस्वी यादव को मुलाकात का क्रेडिट देना भविष्य के नए राजनीतिक समीकरण की ओर इशारा है। साथ ही भारतीय जनता पार्टी पर दबाव की राजनीति है। मामला 16 फीसदी दलित, 16 फीसदी मुसलमान के साथ ही 60 फीसदी पिछड़ी व अतिपिछड़ी जातियों से जुड़ा है। यानी 90 फीसदी वोट बैंक का सवाल है।’

सीएम नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव।

सीएम नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव।

JDU और महागठबंधन एक मंच पर

इस मसले पर नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव या कहे कि JDU और महागठबंधन की पार्टियां राजद, कांग्रेस व लेफ्ट सभी एक मंच पर हैं। जब विधानसभा से दो बार सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ था, तब भाजपा का भी समर्थन जाति जगनणना को था, लेकिन अब भाजपा इससे पीछे हट रही है। यह भी याद रखने की बात है कि पहली बार भाजपा की सरकार में ही सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण दिया गया।

तेजस्वी ने दमदार तरीके से बात रखी

दिल्ली वाली बैठक के बाद तेजस्वी यादव का बॉडी लैग्वेज भी बोल्ड दिखा और वे नीतीश कुमार के सामने कहीं से भी कमजोर नजर नहीं आए। दोनों मुस्कुराते हुए मिलते नजर आए। मीडिया के सामने तेजस्वी यादव ने भी दमदार तरीके से अपनी बात रखी, कहीं उलझे नहीं।

तेजस्वी अब उप मुख्यमंत्री की नहीं, मुख्यमंत्री की रेस में हैं

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार और लालू प्रसाद की पार्टी का गठजोड़ रहा है। वह भी भाजपा कोटे के सभी मंत्रियों को बर्खास्त कर। तब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे और तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री। अब बात उस राजनीति से आगे निकल गई है। 2020 का विधानसभा चुनाव, महागठबंधन ने तेजस्वी को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर लड़ा था। अब ताजा राजनीतिक परिप्रेक्ष्य के मतलब निकाले जाने लगे हैं। यह सभी जानते हैं कि नीतीश कुमार अगर चाहें तो भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़कर भी सरकार बना सकते हैं।

तेजस्वी का लगातार सक्रिय रहना जरूरी

राजनीतिक विश्लेषक ध्रुव कुमार कहते हैं कि विधानसभा चुनाव के बाद तेजस्वी का कद बढ़ा है। अब की स्थिति में तेजस्वी चाहेंगे कि नीतीश कुमार को पीएम मेटेरियल घोषित कर मुख्यमंत्री पद के लिए अपना रास्ता साफ करें, लेकिन फिलहाल नीतीश कुमार राजद के साथ नहीं जाएंगे। इस बैठक के बाद तेजस्वी की छवि और बड़ी हुई है। उनके लिए लगातार सक्रिय रहना जरूरी है। वे जब बीच-बीच में लंबे समय के लिए गायब हो जाते हैं तो विरोधियों को कहना का मौका मिल जाता है।

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