पिता के नाम के लिए बेटे ने लड़ी लड़ाई: पापा ने बेटा मानने से किया इंकार तो DNA टेस्ट तक पहुंची बात, जीत पर भी पिता ने नहीं अपनाया

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खगड़िया28 मिनट पहले

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पिता के नाम के लिए बेटे ने लड़ी लड़ाई

करीब 6 वर्षों से खगड़िया के मोरकाही थाना क्षेत्र के सबलपुर निवासी रणधीर सिंह अपने वास्तविक पिता की पहचान पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। फिल्म लवारिस की कहानी को जीवंत करता उनका यह संघर्ष लोगों के लिए एक मिशाल के तौर पर सामने आ रहा है। अपनी लड़ाई के लिए वे डीएम से लेकर पीएम तक गुहार लगा चुके हैं। जिसके बाद डीएनए टेस्ट में उनके आरोप सत्य प्रतीत होने पर आरोपी पिता को पुलिस ने तीन माह पहले जेल भेज दिया है। रणधीर अब कोर्ट का चक्कर लगा रहे हैं ताकि आरोपी उनके वास्तविक पिता को जमानत नहीं हो।

हक की लड़ाई के लिए नहीं की शादी

रणधीर बताते हैं कि जिस समय उन्होंने यह लड़ाई छेड़ी थी उस समय उनको सिर्फ उनकी मां का साथ मिला था। रणधीर की मां को छह बेटे और एक बेटी है। लेकिन रणधीर अकेले ही अपने पिता का नाम पाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। रणधीर कहते हैं कि वे एक नाजायज औलाद हैं। मां के वास्तविक पति के अलावा गांव के ही एक शख्स से उनके मां के नाजायज संबंध के बीच वे अपना वजूद तलाश रहा हैं। रणधीर बताते हैं कि जब तक उनको उनके असली पिता का संतान होने का दर्जा नहीं मिल जाता तब तक वे शादी नहीं करेंगे।

मां ने बेटे को बताई थी सच्चाई, दिया है साथ

रणधीर बताते हैं कि उनकी इस लड़ाई में उनकी मां ने उनका साथ दिया है। उनकी मां 60 वर्षों की हैं। इस संबंध में जब पांच वर्ष पहले रणधीर ने कोर्ट में केस किया था तो उसमें मां की तरफ से शपथ पत्र भी दायर की गई थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके पति गांव के एक शख्स के यहां मजदूरी करते थे। वे भी अपनी पति के साथ मजदूरी किया करती थी। इसी दौरान खेत मालिक के घर उनका आना जाना लगा रहता था। जिसके बाद मालिक से शारीरिक संबंध स्थापित हो गया। वह उसके घर भी आने लगा था। शपथ पत्र के अनुसार आरोपी ने रणधीर की मां से शादी करने की भी बात कही थी। शपथ पत्र में यह भी कहा गया है कि रणधीर अपने वास्तविक पिता का नहीं बल्कि आरोपी सबलपुर निवासी स्व. चतुरानंद प्रसाद के पुत्र रामानंद प्रसाद का ही पुत्र है।

डीएनए टेस्ट के बाद पिता हुआ है गिरफ्तार

मामले में दिलच्सप मोड़ तब आया था जब रणधीर के बायोलॉजिकल पिता का डीएनए रिपोर्ट रणधीर के डीएनए रिपोर्ट से मैच खा गया। हालांकि आरोपी पुलिस के समझ रणधीर को अपना पुत्र मानने से इंकार कर रहा है। जिसके बाद पुलिस ने तीन माह पूर्व उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इधर रणधीर लगातार कोर्ट की चक्कर लगाकर अपने पिता के जमानत का विरोध कर रहा है। उसका कहना है कि जबतक उसे उसके असली पिता की पहचान नहीं मिलेगी तबतक वह इस लड़ाई को लड़ता रहेगा।

धमकियों का रणधीर पर नहीं पड़ा असर

रणधीर ने अपनी कहानी कहते हुए कहा कि वे बहुत प्रताड़ित जीवन जी रहे हैं। जिस समय उन्होंने यह लड़ाई छेड़ी थी उस समय लोग उनको तरह तरह की बातें कहते थे। जिसे उन्होंने हमेशा नजरअंदाज किया। रणधीर ने बताया कि इस मुश्किल समय में उनको आरोपी पिता की तरफ से कई बार धमकियां भी दी जा चुकी हैं। लेकिन उनपर इसका कोई असर पड़ने वाला नहीं है। इधर मामला कोर्ट में आने के बाद रणधीर लगातार कोर्ट से पिता की जमानत का विरोध करते हुए न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

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