प्रशिक्षण शिविर: प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि भाजपा ने देश में राष्ट्रवाद आधारित राजनीति को बढ़ावा दिया

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मुजफ्फरपुर9 मिनट पहले

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प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते प्रदेश अध्यक्ष

  • दूसरे दिन मंत्री प्रमोद कुमार व पू्र्व मंत्री नंदकिशोर यादव पहुंचे

जनसंघ के बाद भाजपा का गठन देश की संप्रभुता की रक्षा और राष्ट्रवाद आधारित राजनीति को बढ़ावा देने के लिए हुआ था। भाजपा ने हमेशा जन आधारित तंत्र के मूल्य पर राजनीति की। क्योंकि सत्ता का मूल, जन अर्थात जनता ही होता है। भाजपा का अंत्योदय का सिद्धांत इसी को आगे बढ़ा रहा है। ये बातें शनिवार काे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कही। वे मिठनपुरा स्थित हाेटल पार्क में आयोजित भाजपा के विशेष प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उद्घाटन सत्र काे संबोधित करते हुए राज्य सभा सांसद प्राे. राकेश सिन्हा ने कहा कि आज के परिदृश्य में अगर भारत को बदलना है तो उसके लिए इसके गौरवशाली इतिहास को अपने मन मस्तिष्क में पुनर्जीवित करना होगा। अगले सत्र में बिहार के गन्ना व विधि मंत्री प्रमाेद कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन उद्योगों को फिर से जीवंत करने का काम किया है, जो कालांतर में कांग्रेस व अन्य सरकारों के शासन में बंद हो गया। पूर्व मंत्री नंदकिशाेर यादव ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए भाजपा को सत्ता में बनाए रखना कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है। दूसरे दिन के सत्र में भाजपा जिलाध्यक्ष रंजन कुमार, जिला प्रभारी रमेश श्रीवास्तव, महामंत्री सचिन कुमार समेत जिला पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष व महामंत्री, प्रकोष्ठ व विभाग के संयोजक शामिल हुए।

विशेष प्रशिक्षण का आज तीसरा दिन
जिला प्रवक्ता सिद्धार्थ कुमार ने बताया कि रविवार काे तीसरे दिन के सत्र में विधान पार्षद सह प्रदेश महामंत्री देवेश कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार वर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष राधा मोहन शर्मा प्रशिक्षण में शामिल होंगे।

‘देश की विचारधारा ही भाजपा की विचारधारा’
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कहा कि देश की विचारधारा ही भाजपा की विचारधारा है। विचार व्यक्ति व समाज को आईना दिखाता है। विचार ही है, जो किसी व्यक्ति या संगठन को खड़ा करता है या उसे रसातल में ले जाता है। व्यक्ति का निर्माण भी विचार से ही होता है। बिहार-झारखंड के सह प्रचारक राम कुमार ने कहा कि भारत, भाजपा के दृष्टिकोण से राज्य या देश नहीं राष्ट्र हैं क्योंकि राष्ट्र एक सांस्कृतिक इकाई को कहते हैं। अंग्रेज भारत को राष्ट्र नहीं माना बल्कि, विविध भाषा और संस्कृति वाला समूह बताते रहे जो भारत को मानसिक गुलाम बनाने का कुत्सित प्रयास था।

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