बिग बॉस फेम दीपक ठाकुर का EXCLUSIVE INTERVIEW: बोले- बिहार दिवस के कार्यक्रम में बाहरी कलाकारों को दिया मौका; सरकार लोकल कलाकारों का नहीं सोच रही

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पटना28 मिनट पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद

बिग बॉस फेम और गैंग्स ऑफ वासेपुर के गायक दीपक ठाकुर ने मुंबई जाकर कैरियर की तलाश करने वाले युवाओं को कई तरह की नसीहतें दी हैं। कहा कि हम जब अपने मां-पिता, घर परिवार से दूर कहीं जाते हैं और वहां जाकर लड़की के चक्कर में पड़ जाते हैं तो हमारी जड़ हिलने लगती है।

दीपक ठाकुर ने ऐसे समय में यह कहा है जब कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल के विधायक ने एक बिहारी सौ बीमारी कहा है। साथ ही बिहार दिवस में लोकल कलाकारों को मौका नहीं मिलने पर भी उनका दर्द छलका। दीपक ठाकुर दैनिक भास्कर से बात कर रहे थे और इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि बिहारी होने का नुकसान आपको कभी उठाना पड़ा क्या? दीपक ठाकुर से प्रणय प्रियंवद की पूरी बातचीत पढ़िए-

सवाल- दीपक ठाकुर आपसे सबसे पहला सवाल है कि बिग बॉस में एज ए बिहारी आपका अनुभव कैसा रहा?
जवाब- बहुत शानदार अनुभव रहा। लोगों ने खूब प्यार- आशीर्वाद दिया। हम किसी फिल्मी परिवार से नहीं आते हैं। हमारा कोई गॉड फादर नहीं। अपनी मेहनत से वहां गए। ऐसा लगा ही नहीं कि वहां अपना कोई नहीं है। जब अंदर गए तो तरह-तरह के सितारे दिखे। वे हमारे साथ तीन माह रहे। कभी शाहरुख खान कभी रणवीर सिंह आ गए। यह पूरा शानदार सफर था। मेरे पूरे जीवन को सुनहरे पन्नों में इस कार्यक्रम ने लिख दिया।

सवाल- आप तो बिहार से बाहर भी कार्यक्रमों में जाते रहे हैं। आपको कभी लगा कि बिहारी होने की वजह से आपके साथ कुछ अच्छा नहीं हो रहा है?
जवाब- देखिए पंकज त्रिपाठी, मनोज वाजपेयी काम कर रहे हैं न। लेकिन ऐसी इंडस्ट्री हमारे बिहार में होती तो हम यहीं की खाते-पीते और यहीं काम करते। ऐसा नहीं है कि हम लोगों को मुंबई में काम करने से रोका जाता है।

सवाल- सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला जब सामने आया तब इस तरह का सवाल खूब उठा था, इसलिए आपसे यह सवाल है?
जवाब- सुशांत सिंह राजपूत दिल में बसते हैं। उनको देखकर हमने सपना देखना शुरू किया, लेकिन हम जब मुंबई या अन्य बड़ी जगह जाते हैं तो अपने माता-पिता का संस्कार भूलते हैं और वहां की लड़की के चक्कर में पड़ जाते हैं तो हमारी जड़ हिलने लगती है। हम देखते हैं कि वहां दारू, ड्रग्स, गांजा, चरस सब चलता है। कई वीडियो में यह सब दिखता रहा है।

अपनी मां और दोनों बहनों के साथ दीपक ठाकुर।

अपनी मां और दोनों बहनों के साथ दीपक ठाकुर।

सवाल- बिहारी युवक बाहर जाएं तो इस सब से बच कर रहें?
जवाब- काहे करेंगे। क्या जरूरी है कि अपने को बड़ा दिखाने के चक्कर में गांजा, चरस सब दिखाना जरूरी थोड़े न है। क्लास दिखाने का जरिया यह तो नहीं है। मेरी हमेशा से मांग रही है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच निष्पक्ष तरह से हो। अभी भी अनसुलझी पहली जैसी है उनकी मौत। वक्त के साथ सब लोग बदल गए। उस समय सभी की भावना थी। अब आईपीएल शुरू होगा लोग उसे देखने लगेंगे।

सवाल- आपके गानों की बात करते हैं। सुनाइगा गाना?
जवाब- फ्रस्टिाओ नहीं मुरा…. नरभरसाओ नहीं मुरा… एनी टाइम मुड़वा को अपस्टाओ नहीं……

सवाल- ये मूड आप कहां से लाते हैं कि इसमें इतने सारे अप्स एंड डाउन आते हैं? आपके चेहरे पर भी लाली आ जाती है?
जवाब- आप रिपोर्टर हैं आपको सवाल पूछने का तरीके पता हैं, हम सिंगर हैं हमें गाने का पता है।

सवाल- सभी सिंगर के साथ ये बात नहीं है, इसलिए आपसे यह सवाल है, बताइए?
जवाब- हम लोग बचपन से सीखे हैं। हम गाते नहीं बल्कि उसे जीते हैं।

म्यूजिक वीडियो के दौरान बिग बॉस फेम सोमी खान के साथ दीपक ठाकुर।

म्यूजिक वीडियो के दौरान बिग बॉस फेम सोमी खान के साथ दीपक ठाकुर।

सवाल- आपके चेहरे पर जैसे गांव आ जाता है?
जवाब- देखिए हमारे हिसाब से जो इंसान जैसा हो उसे वैसा ही दिखना चाहिए। जीवन में फिल्टर जितना कम होगा उतना आप खुल कर जी सकेंगे। ऐसे भी खूब टेंशन है। उसका गाना हिट त उसका नहीं…. परिवार का टेंशन। जितना पैसा- कौड़ी मिलता है खुलकर जिएं। बस अच्छे से पैसा कमाइए।

सवाल- बिहार सरकार का रवैया कलाकारों के प्रति कैसा है?
जवाब- अभी बिहार दिवस का आयोजन किया गया पर ज्यादातर बाहर के कलाकारों को बुलाया गया। अच्छा लगता यहां के कलाकारों को मौका मिलता। सरकारें आईं सरकारें गईं। कोरोना के समय म्यूजिशियन, वाद्य बजाने वाले कैसे जीएंगे उनके बारे में किसी ने सोचा? दीपक को तो विज्ञापन करने से, कहीं से मिल जाएगा पर दीपक के साथ के कलाकारों का क्या होगा? गांव में आंगनबाड़ी केन्द्र बन रहा है। स्कूल बने हैं, पर कलाकारों के लिए नहीं सोचा जा रहा। हर जिला में समय पर महोत्सव हो। कलाकारों को सरकार शॉर्ट लिस्ट करे।

सवाल- आप बोचहां से आते हैं। वहां उपचुनाव हो रहा है। क्या स्थिति है बोचहां की?
जवाब- बहुत ज्यादा टफ इलेक्शन वहां है। कोई बिहारी कहता है कि उसे पॉलिटिक्स से मतलब नहीं है तो वह गलत कहता है। बिहार का बच्चा-बच्चा पॉलिटिक्स समझता है। बोचहां में कांटे का टक्कर है। हर उम्मीदवार सेर पर सवा सेर है। हम तो वहां से निकलकर मुंबई जा रहे हैं। बोचहां बाढ़ वाला इलाका है उससे निजात दिलाने का प्लान बनाना चाहिए। इंदिरा आवास लोगों ने बना लिया, बाढ़ में घर कट गया। अब उसका फोटो कहां से लोग लाएंगे? ऐसे लोगों को फिर से इंदिरा आवास मिलना चाहिए।

सवाल- आप मुंबई जा रहे हैं। नई प्लानिंग के बारे में बताएं? चर्चा है किसी वेब सीरीज में लगे हैं आप?
जवाब- रवि भैया, मुजफ्फरपुर पर वेब सीरीज बना रहे हैं। मुजफ्फरपुर का इतिहास होगा इसमें। हम मुजफ्फरपुर को करीब से जानते हैं। उस पर स्क्रिप्टिंग आदि का काम चल रहा है।

सवाल- चलते-चलते अपने मूड का एक गाना सुनाएंगे?
जवाब- हम तुम भोले सैंया…. जग है जुल्मी… प्रीत को पाप कहते अधर्मी….. प्रीत को पाप कहते अधर्मी.. जग से मत कहियो रे बात आपस कि…… हमरी अटरिया पर आ जाना संवरिया .. देखा… देखी बालम हो जाए.. रे…….।

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