बिहार पर CAG की रिपोर्ट: 44 विभाग खर्च नहीं कर पाए 46.4 हजार करोड़ रुपए, 2 विभागों में 6.36 करोड़ का घोटाला भी मिला

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पटना3 घंटे पहलेलेखक: शालिनी सिंह

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  • CAG ने बिहार विधानसभा में साल 2017-18 की रिपोर्ट की है पेश

देश के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) ने आज अपनी रिपोर्ट बिहार विधानसभा में पेश की। इस रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के विभागों द्वारा खर्च नहीं कर पाने के कारण 46 हजार करोड़ की राशि पड़ी रह गई। CAG ने साल 2017-18 की अपनी यह रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में अधिकारियों की लापरवाही के कारण सरकार को हुए नुकसान का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। इसमें पंचायतों को अनुदान मिलने में हुई देरी से हुए नुकसान से लेकर बिजली वितरण में गड़बड़ी के कारण सरकार को हुए नुकसान का भी ब्यौरा है।

यह हैं रिपोर्ट के मुख्य प्वाइंट्स:

  • राज्य के 44 विभाग साल 2017-18 के 187344.00 करोड़ के कुल बजट में से 140947.00 करोड़ ही खर्च कर पाए।
  • 281420.43 करोड़ के वित्तीय मामले से जुड़े 7760 निरीक्षण प्रतिवेदनों को 1 साल से 8 साल तक लंबित रखा गया।
  • ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिव के 56 फीसदी पद खाली हैं, जबकि नगरपालिकाओं में 62 फीसदी पद खाली हैं।
  • LED लाईट की खरीद के लिए टेंडर के मूल्यांकन के दौरान न्यूनतम दर का टेंडर डालने वाले को नगर परिषद्, अरवल ने जान-बूझकर नहीं लिया। इससे 50.33 लाख रुपए की राशि का अधिक भुगतान किया गया।
  • लापरवाही से कूड़ेदान की खरीद पर दो शहरी निकायों को 6 करोड़ 98 लाख रुपए का नुकसान हुआ।
  • 2015 से 2018 के दौरान ग्राम पंचायतों को अनुदानों का हस्तांतरण करने में 11 से 261 दिनों की देरी हुई। इस कारण 8.12 करोड़ की राशि पंचायती राज विभाग को दांडित ब्याज के तौर पर ग्राम पंचायतों को भुगतान किया गया।
  • बिहार सरकार द्वारा शर्तो को पूरा नहीं करने के कारण 2016-18 के त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को 878.56 करोड़ की राशि नहीं मिल पाई।
  • शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के आधार डिजिटलीकरण के रोके जाने से 1.98 करोड़ का व्यय बेकार हो गया।
  • वित्तीय नियमों की अनदेखी के कारण 2.89 करोड़ का गबन हुआ। विद्युत शुल्क छूट लेने में नगर-निगमों के असफल होने के कारण 5.14 करोड़ की राशि का ज्यादा भुगतान करना पड़ा।
इन विभागों ने वित्तीय वर्ष के 11 महीनों की अपेक्षा अकेले मार्च माह में कुल बजट की औसतन 40 फीसदी राशि खर्च की।

इन विभागों ने वित्तीय वर्ष के 11 महीनों की अपेक्षा अकेले मार्च माह में कुल बजट की औसतन 40 फीसदी राशि खर्च की।

सरकारी अफसरों और कर्मचारियों ने किया गबन

  • पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के जिला कल्याण पदाधिकारी की लापरवाही की वजह से आरा, बेगूसराय और बांका में जिन छात्रावासों के जीर्णोद्धार पर 3.47 करोड़ रुपये खर्च किया गया, उनकी जांच करने पर भवन क्षतिग्रस्त ही पाया गया। कार्यपालक अभियंताओं ने छात्रावासों के जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने की रिपोर्ट विभाग को दी थी पर विभाग के स्तर से कार्रवाई नहीं की गई। जब CAG ने इस ओर ध्यान दिलाया तब विभागीय स्तर पर जांच में अफसरों को चिन्हित कर कार्रवाई की गई है।
  • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग में 2.89 करोड़ रुपए गबन का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक रोकड़पाल ने बच्चों के वजीफे की राशि 1.43 करोड़ रुपए अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिया और इसकी भनक तक जिला कल्याण पदाधिकारी, बांका को नहीं लगी। इसी तरह विभाग की वित्तीय व्यवस्था में नियमों की अनदेखी कर 1.46 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का मामला भी उजागर हुआ है।

बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने 32 वर्षो से नहीं दिया हिसाब-किताब

CAG ने अपनी रिपोर्ट में बिहार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के काम-काज के तरीके पर सवाल उठाया है। कैग के मुताबिक बिहार में कुल 32 सरकारी कंपनी और 3 सांविधिक निगम हैं जो कार्यशील हैं। इसमें से बिहार राज्य वित्तीय निगम और बिहार राज्य भंडारण निगम ने एक वर्ष से लेखापरीक्षा नहीं दिया। वहीं बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने 32 वर्षों से लेखा परीक्षा नहीं दिया है। लेखा परीक्षा प्रतिवेदन का सामान्य शब्दों में अर्थ निकालें तो इन उपक्रमों ने अपने खर्च और आमदनी का ऑडिट रिपोर्ट विधानमंडल के सामने नहीं रखा। बिहार में कुल सात लाभ अर्जित करनेवाले उपक्रम हैं लेकिन राज्य सरकार के पास कोई लाभांश नीति नहीं होने के कारण ये उपक्रम अपना लाभ सरकार को नहीं दे रहे हैं। साल 2015-16 में बिहार स्टेट रोड डेवलमेंट कॉपोरेशन लिमिटेड ने अपने लाभ 93.86 करोड़ में से 5 करोड़ और बिहार राज्य पुल निगम ने अपने लाभ 70 करोड़ 26 लाख में से केवल 1.05 करोड़ लाभांश सरकार को दिया था। केन्द्रीय विद्युत विनियामक आयोग विनियमन 2014 के अनुसार बिजली वितरण का सही प्रबंधन नहीं कर पाने के कारण दोनों बिजली डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को कुल 115.23 करोड़ के बिजली बिल का नुकसान उठाना पड़ा।

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