बिहार भाजपा के दलित प्रेम का यूपी कनेक्शन: 2019 में दलित महिलाओं के साथ रेप के 3486 मामले हुए दर्ज, तब थी चुप, अब अपनी ही सरकार को कोस रही भाजपा

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पटना15 मिनट पहलेलेखक: शालिनी सिंह

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बिहार में चुनाव बीते 7 महीने हो चुके हैं। भाजपा सरकार में है, लेकिन इन दिनों वह अपनी ही सरकार को दलितों के मुद्दे पर हर रोज कोस रही है। आखिर मामला क्या है। क्यों भाजपा को अचानक दलितों की चिंता सताने लगी है। भाजपा को समझने वाले जानकार ये मानते हैं कि ये चिंताएं पार्टी की नई रणनीति का हिस्सा हैं। यह वो रणनीति है, जिसके जरिए भाजपा उत्तरप्रदेश को बिहार के रास्ते साधने की कोशिश में लगी है।

अपनी ही सरकार पर दलित उत्पीड़न के आरोप
भाजपा में दलितों के मुद्दे पर सरकार को कोसने का एक सिलसिला चल पढ़ा है। इसकी शुरुआत किसी और ने नहीं, बल्कि खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने की। इसके बाद तो मानों सिलसिला चल पड़ा। संजय जायसवाल के बाद भाजपा कोटे के मंत्री जनम राम और फिर विधायक हरिभूषण ठाकुर ने भी ऐसे ही आरोप लगाए। इन नेताओं ने अपने बयान में न सिर्फ बिहार में दलित उत्पीड़न बढ़ने के आरोप लगाए, बल्कि इन मामलों में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सूबे की कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए।

भास्कर आपको सिलसिलेवार तरीके से बता रहा इन बयानों को

  • 6 जून : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने अपने लंबे फेसबुक पोस्ट में जो लिखा, उसके कुछ प्रमुख अंश हैं ,” दलित अत्याचार की घटनाएं अचानक किशनगंज और पूर्णिया जिले में भी बढ़ गई हैं। प्रशासन को हर जगह चौकसी की जरूरत है। जब जिला प्रशासन एक तरफ खड़ा होकर निर्दोषों को भी दंड देने लगता है तो समाज में बहुत गलत संदेश जाता है। “
  • 7 जून : सरकार में मंत्री और भाजपा नेता जनक राम ने कहा- प्रदेश के विभिन्न जिलों में महादलित समुदाय की लड़कियों को कथित तौर पर अगवा कर जबरन धर्म परिवर्तन कर उनका निकाह कराया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने गोपालगंज और जमुई के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को 4 और 6 जून को पत्र भी लिखा है।
  • 9 जून : भाजपा के विस्फी विधानसभा क्षेत्र के विधायक हरिभूषण ठाकुर ने मदरसों को बंद करने की मांग करते हुए बिहार में दलित समुदाय पर अत्याचार बढ़ने का आरोप लगाया। विधायक का कहना था कि दलितों पर अत्याचार अल्पसंख्यक समुदाय के लोग कर रहे हैं।

2019 में दलित महिलाओं के साथ रेप के 3486 मामले हुए दर्ज- NCRB

भाजपा के आरोपों में कितना दम है, इसे समझने के लिए NCRB की रिपोर्ट को देखा जा सकता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में बिहार में दलित अत्याचार के मामलों में 7 फीसदी का इजाफा हुआ। 2018 में 42,792 मामले दलित अत्याचार से जुड़े सामने आए तो 2019 में इनकी संख्या बढ़कर 45,935 हो गई। यही नहीं, 2019 में 3486 रेप के ऐसे मामले आए, जिनमें पीड़ित दलित समाज से थीं। 2017 में दलित अत्याचार के 43,200 मामले दर्ज हुए, 2016 में यही आंकड़ा 40,801 का था, जबकि 2015 में दलित अत्याचार के 38,670 मामले दर्ज हुए थे। साल दर साल इसमें बढ़ोत्तरी ही हो रही है। 18 फरवरी 2020 को पटना दौरे पर आए SC आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया ने बिहार में दलित अत्याचार पर चिंता जताई थी। उनके मुताबिक देश में दलित अत्याचार का औसत 21 प्रतिशत है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा 42 प्रतिशत।

भाजपा के बदले तेवर में है यूपी चुनाव का एंगल
दलित अत्याचार से जुड़े आंकड़ों को देखकर यह समझा जा सकता है कि बिहार में अचानक से कुछ नहीं बदला। फिर भाजपा के तेवर क्यों बदल गए हैं। वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं ,”भाजपा धार्मिक गोलबंदी करने की कोशिश कर रही है। इसकी वजह है यूपी चुनाव, जहां दलित एक बड़ा वोट बैंक है।” गौर करने लायक बात यह है कि भाजपा ने जितने भी मामले उठाए हैं, उनमें दलितों के सामने जो दूसरा पक्ष खड़ा है, वह अल्पसंख्यक समुदाय है। भाजपा असल में दलितों के जबरन धर्मांतरण का मामला सामने लाना चाहती है। बिहार चुनाव में जदयू के साथ गठबंधन होने की वजह से पार्टी ऐसे मुद्दों को नहीं उठा पाई, लेकिन यूपी में दलितों के धर्मांतरण का मुद्दा पहले भी राजनीति के केन्द्र में रह चुका है। ऐसे में भाजपा एकबार फिर से इसे बहस में लाना चाहती है। बिहार , यूपी का पड़ोसी राज्य है। गोपालगंज जैसे जिले तो यूपी से सटे भी हैं। ऐसे में यहां अगर यह मामला तूल पकड़ता है तो इसका असर यूपी में भी होगा। भाजपा को वहां दलित-मुस्लिम ध्रुवीकरण का फायदा मिल सकता है।

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