भाई सुशांत सिंह राजपूत से मिली कठिन परिश्रम की प्रेरणा: फर्स्ट अटेम्प्ट में BPSC क्रैक करने वाली स्टूडेंट लीडर दिव्या गौतम ने कहा- पॉलिटिक्स में गहरी रुचि, महिला नेत्रियों से काफी कुछ सीखती हूं

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पटना34 मिनट पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद

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दिव्या गौतम

सक्रिय स्टूडेंट लीडर दिव्या गौतम ने 64वीं BPSC संयुक्त परीक्षा क्रैक किया है। फर्स्ट अटेम्प्ट में ही उन्होंने सफलता पाई है। दिव्या दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की ममेरी बहन हैं। वह सुशांत से बहुत प्रभावित रही है। सफलता के बाद उन्होंने कहा- सुशांत के कठिन परिश्रम से प्रेरित हूं। वह पढ़ने में जितने मेधावी थे, उन्होंने एक्टिंग में भी उतना ही पैनापन था। एक्टिंग के लिए भी उन्होंने उतनी ही मेहनत की। आज वह हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन इस बात का हमलोगों को अभी तक विश्वास नहीं हो पाता है। सुशांत का घर पटना के राजीव नगर में रोड नंबर 6 में है और दिव्या का घर रोड नंबर 9 में। दिव्या तीन बहनें ही हैं, इसलिए ममेरे भाई सुशांत को सगे भाई की तरह मानती थीं। वह बहुत खुशमिजाज और मेधावी थे। दैनिक भास्कर ने दिव्या गौतम से बातचीत की-

सबसे पहले आपको बधाई। आप तो स्टूडेंट लीडर रहीं। छात्र संगठन आइसा की फायर ब्रांड नेत्री थीं पटना यूनिवर्सिटी में। वह सब कैसे छोड़ दिया ?
एकेडमिक्स में मेरा हमेशा इंटरेस्ट रहा। मेरी मां की इच्छा थी कि मैं पढ़ाई पूरी कर लूं। उसके बाद राजनीति करुं। मां ने ही टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में नामांकन के लिए प्रेरित किया। मेरी मां का सपना था कि मैं BPSC क्वालिफाई करूं।
आप राजनीति में आएंगी ?
अभी मैं नहीं बता सकतीं। लेकिन पॉलिटिक्स में मेरी रुचि गहरी है। अभी भी महिला नेत्रियों को मैं देखती हूं। सीखती हूं।
आपको सबसे ज्यादा कौन प्रभावित करती हैं?

बहुत सारी हैं। जैसे बिहार में सरोज चौबे, शशि यादव, अनिता जी से मैं काफी प्रभावित रही। ये एपवा से जुड़ी हैं। वृंदा करात जैसों को दूर से देखा है पर बिहार की इन एक्टिविस्ट को जमीन पर काम करते हुए देखा है। कभी PMCH की घटना तो कभी किसी गैंग रेप की घटना पर एक्टिव होते देखा, घर परिवार सब संभालते हुए। ये बहुत बड़ी बात है।
आपका कौन सा प्रयास BPSC में था ?
यह मेरा पहला प्रयास था। मैंने तैयारी तब शुरू की जब 2017 में मेरी मां का देहांत हो गया। मेरी मां कहती थीं कि वह अफसर बनना चाहती थीं लेकिन हम लोगों के जन्म के बाद घर-गृहस्थी में व्यस्त हो गईं। मेरी मां कभी भी पिता जी के साथ नहीं रह पाईं। पूरा जीवन हम लोगों की पढ़ाई में समर्पित कर दिया। मैंने मां का सपना पूरा किया है।
अपने परिवार के बारे में बताएं?
मेरी मां का नाम स्व. ललिता सिंह है। मेरे पिता जी का नाम भूपेन्द्र कुमार सिंह है। वह असिस्टेंट इंजीनियर से रिटायर हैं। हम तीन बहनें है। भाव्या- जीविका में फाइनेंस प्रोफेशनल है और प्रेरणा दिल्ली यूनिवर्सिटी से सोशल वर्क में MA. कर रही हैं। हमारा पुस्तैनी घर खगड़िया जिले के चौथम में पड़ता है। गांव का नाम बोरने है।
अभी आप क्या कर रही हैं?
अभी मैं पटना वीमेंस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हूं मास कम्युनिकेशन में। PHD, बिट्स पिलानी से कर रही हूं। जेंडर एंड कम्युनिकेशन, मेरे रिसर्च का टॉपिक है। मैंने झारखंड में ग्रामीण विकास विभाग में कम्युनिकेशन प्रोफेशनल पर पर कार्य किया खूंटी में। जीविका में कम्यूनिकेशन मैनेजर के रुप में कार्य किया है।
कोई एकेडमिक स्टूडेंट जो असिस्टेंट प्रोफेसर हो उसके लिए आसान होता है BPSC निकालना?
आप किसी जॉब में रहते हैं अगर बच्चे छोटे होते हैं तो उनके लिए चैलेंजिंग होता है। मेरे लिए तो दूसरी बात है। मैं पढ़ने-पढ़ाने में ही लगी रहती हूं।
अभी तो आपकी शादी नहीं हुई है। शादी की क्या प्लानिंग है?
सोचा नहीं है। आने वाले समय में डिसाइड करेंगे कि क्या करना है। शादी जरूरी पड़ाव है। यह जरूरी नहीं कि जो घर में बड़ा हो पहले उसी की शादी हो।
जो स्टूडेंड तैयारी कर रहे हैं उन्हें क्या मेसेज देंगी?
सफल अभ्यर्थियों को बहुत बधाई देती हूं। यह अपील करना चाहती हूं कि जो महिलाएं तैयारी में जुटी हैं उन्हें घर वाले मदद करें। हसबैंड या जो भी जेंस घर में हैं उन्हें मदद करनी चाहिए। ज्यादा से ज्यादा महिलाएं पैर पर खड़ी होंगी तो समाज के लिए भी बेहतर होगा।
आपको तो काफी दिक्कत भी हुई होगी? सुशांत सिंह राजपूत का निधन जिस तरह से हुआ और उस पर कंट्रोवर्सी हुई, उससे आपकी पढ़ाई बाधित हुई होगी ?
यह बहुत ज्यादा डिस्टर्बिंग था। खुद को संभालना और पूरे परिवार को संभालना बड़ा चैलेंज था। मेरे पिता जी भी यहां नहीं थे और मेरे फूफा जी भी यहां नहीं थे। मेरा BPSC 65 वीं मेंस परीक्षा का समय आ गया था। ऐसे में पूरे परिवार को बांध कर रखना और पढ़ाई करना बहुत मुश्किल भरा दौर था।
सुशांत सिंह राजपूत की कैसी यादें हैं ?
दो साल पहले अप्रैल- मई के महीने में वे अपने गांव आए थे। उनका जहां ददिहाल है वह मेरा ननिहाल है। वहां वे खुद पूजा करने आए हुए थे। फुआ की कुछ मनौती थी। सुशांत भैया का कहना था कि अपने प्रोफेशन को प्रोफेशनली लेना चाहिए। सुशांत भैया एक्टिंग भी करते थे और लोगों की मदद भी। बाढ़ के समय भी वह एक्टिव थे। वे बचपन में हमें फिजिक्स और मैथ पढ़ाते थे। उनकी काफी दिलचस्पी फिजिक्स और मैथ में काफी थी। वे थियेटर में गए पर उनका इंटरेस्ट अभी भी कई चीजों में था। उनके घर में अभी भी आपको दूरबीन दिखेगा।

किसी को यह भरोसा नहीं था कि सुशांत सिंह राजपूत जैसा हीरो सुसाइड भी कर सकता है?
यह हम लोगों के लिए भी भरोसा करने की बात नहीं थी, क्योंकि एक साल पहले ही जो इंसान घर पर आकर अपने परिवार से मिल कर गया था, उसके बारे में हम ऐसा सोच भी नहीं सकते थे। कोई भी नहीं सोच सकता। हम लोग तो भैया की नई फिल्म का इंतजार कर रहे थे कि भैया अब नया क्या करेंगे। हम लोगों के लिए वे बहुत बड़े इंस्पीरेशन थे। उनसे जुड़ा पूरा मामला अब सबज्यूडिस है। उस पर काम हो रहा है।

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