मधुबनी में 4 घंटों से एम्बुलेंस के इंतजार में बच्चे: बाल ह्रदय योजना में पटना से जांच कर लौटे, घर जाने के लिए नहीं इंतजाम

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मधुबनी4 घंटे पहले

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बच्चों व उनके परिजनों को करीब 4 घंटों से घर जाने के लिए एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी बाल हृदय योजना, जन्मजात दिल में छेद से ग्रसित तथा अन्य बीमारियों से ग्रसित जिले के 16 बच्चों को जांच के लिए गुरुवार देर रात पटना भेजा गया था। इस योजना के तहत मधुबनी जिले के कई बच्चों की सर्जरी की जा चुकी है। हालांकि पटना से आने के बाद बच्चों व उनके परिजनों को करीब 4 घंटों से घर जाने के लिए एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ रहा है।

मामले में सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा ने बताया कि एंबुलेंस समय पर क्यों नहीं पहुंची, इसकी जानकारी ली जा रही है। जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

45 प्रकार की बीमारियों का समुचित इलाज
इस कार्यक्रम के तहत बच्चों में 45 तरह की बीमारियों की जांच कर उसका समुचित इलाज किया जाता है। इन सभी बीमारियों को चार मूल श्रेणियों में बांटकर इसे 4-डी का नाम दिया गया है। इसके तहत जिन बीमारियों का इलाज होता है उनमें दांत सड़ना, हकलापन, बहरापन, किसी अंग में सून्नापन, गूंगापन, मध्यकर्णशोथ, आमवाती हृदयरोग, प्रतिक्रियाशील हवा से होने वाली बीमारियां, दंत क्षय, ऐंठन विकार, न्यूरल ट्यूब की खराबी, डाउनसिंड्रोम, फटा होठ एवं तालू/सिर्फ़ फटा तालू, मुद्गरपाद (अंदर की ओर मुड़ी हुई पैर की अंगुलियां), असामान्य आकार का कुल्हा, जन्मजात मोतियाबिंद, जन्मजात बहरापन, जन्मजात हृदयरोग, असामयिक दृष्टिपटल विकार आदि शामिल हैं।

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