सेनारी हत्याकांड मामले में 14 अभियुक्तों को नोटिस जारी: 1999 में सेनारी हत्याकांड मामले में बिहार सरकार ने दायर की थी सुप्रीम कोर्ट में याचिका; पटना हाईकोर्ट ने अभियुक्तों को बरी किया था

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पटना26 मिनट पहले

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1999 में बिहार के सेनारी नरसंहार मामले में पटना हाईकोर्ट द्वारा 14 दोषियों को बरी किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस अपील को एडमिट करते हुए सभी बरी किए गए अभियुक्तों को नोटिस जारी किया है। 21 मई, 2021को पटना हाईकोर्ट ने 14 दोषियों के विरुद्ध पर्याप्त सबूत नहीं होने और गवाही में विरोधाभास के कारण उन्हें बरी करने का आदेश दिया था। निचली अदालत ने इस हत्याकांड के दोषियों में से 11 को फांसी और 3 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। जहानाबाद जिला अदालत ने 15 नवंबर, 2016 को सजा सुनाई थी।

इस मामले में माओवादियों ने उच्च वर्ग के 34 लोगों की हत्या कर दी थी, सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया गया था। बिहार सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक की मांग करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत से मामले के निपटारे तक सभी 13 को आत्मसमर्पण करने की मांग की है।

इस आदेश के विरुद्ध इन सभी ने पटना हाईकोर्ट में अपील दायर कर निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इन्हें बरी करने का आदेश दिया था। एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने राज्य सरकार को इस आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने की सलाह दी थी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार की अपील को एडमिट करते हुए बरी हुए सभी को नोटिस जारी किया है।

18 मार्च 1999 का ये नजारा आज भी लोगों को याद है।

18 मार्च 1999 का ये नजारा आज भी लोगों को याद है।

18 मार्च 1999 को सेनारी हत्याकांड ने बिहार समेत पूरे देश को झकझोर दिया था। यहां सवर्ण समाज से जुड़े 34 लोगों को निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया गया था। मामले में आरोपी बनाए गए ज्यादातर लोग भाकपा (माओवादी) से जुड़े थे। सेनारी में नक्सली 18 मार्च को एक जाति विशेष के लोगों को घरों से उत्तर सामुदायिक भवन के पास ले गए थे। वहां उनकी गर्दन रेतकर हत्या कर दी गई थीं। नरसंहार के बाद सरकार ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया था।

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