हाईकोर्ट ने जताई थी कई बिंदुओं पर जांच की संभावना: पुलिस नहीं खड़ा कर पाई गवाह, दो परीक्षा माफिया जमानत पर छूट गए

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पटनाएक घंटा पहलेलेखक: शशि सागर

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हाईकोर्ट ने कहा था- केस के आईओ साढ़े तीन महीने की जांच के दौरान एक भी गवाह खड़ा नहीं कर पाए जिन्होंने कहा हो कि उसने नौकरी के लिए आरोपियाें को चेक या डॉक्यूमेंट दिए थे।

दानापुर से पकड़े गए चार परीक्षा माफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा है। पटना पुलिस मुजफ्फरपुर तक छापेमारी कर आई है। हालांकि इन्हीं माफियाओं से जुड़े पुराने मामलों को देखने से स्पष्ट होता है कि पटना पुलिस उन्हें जानबूझकर बचाती है। एफआईआर और आरोपियाें के बयान दर्ज करने के अलावा पुलिस कुछ नहीं कर पाती है और आरोपियाें को जमानत मिल जाती है। ऐसा ही मामला एसके पुरी थाने का है।

8 अगस्त 2021 को एसके पुरी थाने की पुलिस ने आनंदपुरी में छापेमारी कर अंशु के भाई रितेश को गिरफ्तार किया। अंशु सहित अन्य पर नौकरी देने के नाम पर ठगी का केस दर्ज किया गया। कोर्ट से 3 नवंबर 2021 को रितेश और 30 नवंबर 2021 काे उसके बड़े भाई अंशु सिंह को जमानत मिल गई।

कोर्ट ने अंशु को जमानत देते वक्त पूरी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा था-केस के आईओ साढ़े तीन महीने की जांच के दौरान एक भी गवाह खड़ा नहीं कर पाए जिन्होंने कहा हो कि उसने नौकरी के लिए आरोपियाें को चेक या डॉक्यूमेंट दिए थे। जबकि, अंशु के घर से सैकड़ों डॉक्यूमेंट, कई ब्लैंक चेक आदि बरामद किए गए थे। चार्जशीट जमा करने तक केस के आईओ ने एक भी डॉक्यूमेंट या चेक को वेरिफाई नहीं किया था।

कोर्ट ने टिप्पणी की-आईओ ने मामले की जांच सही तरीके से नहीं की है। पूरी केस डायरी में पुलिस वालों के बयान के अलावा कुछ नहीं है। पुलिस ऐसा कोई साक्ष्य नहीं तलाश पाई जिससे यह साबित हो कि अंशु और उसके भाई परीक्षा में फर्जीवाड़े का गिरोह चलाते हों। इस केस में आईओ राजेश कुमार को बनाया गया था। पुलिस ने 6 अक्टूबर 2021 को कोर्ट में चार्जशीट जमा की थी।

हाईकोर्ट ने जताई थी कई बिंदुओं पर जांच की संभावना
8 अगस्त 2021 को एसके पुरी थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद रितेश को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। 13 सितंबर 2021 को रितेश की जमानत अर्जी पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने रितेश की जमानत अर्जी को अस्वीकार कर दिया। साथ ही यह टिप्पणी भी की कि मामले में अभी जांच चल रही है। कई बिंदुओं पर जांच होना बाकी है।

आरोपी के घर से कई डॉक्यूमेंट, एडमिट कार्ड, शैक्षणिक कागजात, लैपटॉप आदि जब्त हुए हैं। इतना कहते हुए रितेश की जमानत अर्जी को रद्द कर दिया गया था। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद भी पुलिस ने मामले में जार्चशीट जमा की और आरोपियाें के खिलाफ एक भी साक्ष्य नहीं ला पाई।

घर से जब्त हुए थे सैकड़ों डॉक्यूमेंट

अंशु के घर पर 8 अगस्त 2021 को एसके पुरी थाने की पुलिस ने छापेमारी की थी। एफआईआर के अनुसार रितेश की गिरफ्तारी हुई। घर के पास स्थित एक गैराज से विभिन्न परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, कई ब्लैंक चेक, दर्जनों छात्रों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, चार लैपटॉप, उसमें कई संदिग्ध सॉफ्टवेयर आदि बरामद हुए थे। बीएसईबी टीईटी, सिपाही भर्ती के एडमिट कार्ड, कई डॉक्टरों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र आदि बरामद हुए थे।

रितेश ने गिरफ्तारी के वक्त बयान दिया था कि उसका भाई अंशु सिंह अपने दोस्त जहानाबाद के अतुल वत्स, नालंदा के विवेक, गौरव, भूषण, गुंजन पटेल आदि के साथ मिलकर एक रैकेट चलाता है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में स्कॉलर बिठाकर फर्जीवाड़ा करते हैं।

न्यायिक हिरासत बढ़ाने की अपील तक नहीं की
मामले में चार्जशीट होने के बाद 3 नवंबर 2021 को रिेतेश की तरफ से उसके वकील ने दाेबारा कोर्ट में जमानत अर्जी दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आईओ की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि चार्जशीट जमा करने के बाद कोर्ट से यह अपील भी नहीं की कि जांच अभी जारी है। आरोपी को न्यायिक हिरासत में ही रखा जाए। चार्जशीट में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि आरोपी कोई रैकेट चलाते हैं।

आईओ ने कहा-जितना साक्ष्य मिला, केस डायरी में लिख दिया

केस के आईओ राजेश कुमार हैं। कुछ दिन पहले ही उनका ट्रांसफर फुलवारीशरीफ थाने में हुआ है। कोर्ट की टिप्पणी के बाबत उनसे जब पूछा गया तो उन्होंने पहले तो आनाकानी की, फिर कहा कि हमें जितना साक्ष्य मिला है हमने डायरी में लिख दिया। कहा कि छापेमारी पुलिस ने की थी इस कारण बयान भी पुलिस का डायरी में है। इसके बाद उन्होंने यह कहते हुए कि हम छुट्टी में हैं, फोन रख दिया।

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