हिस्ट्रीशीटर का मर्डर गोली से नहीं, गला दबाकर हुआ: पोस्टमार्टम में गोली लगने की बात नहीं आई, गले पर रस्सी और सिर पर जख्म का निशान

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पटनाएक घंटा पहले

प्रशांत की फाइल फोटो।

हिस्ट्रीशीटर और शराब का अवैध कारोबार करने वाले प्रशांत कुमार की हत्या में बड़ा झोल है। वारदात के वक्त से पटना पुलिस कहती आ रही है कि अपराधियों ने प्रशांत के सिर में गोली मारी थी। इस बात को जक्कनपुर के थानेदार सुदामा सिंह ने कहा था। मंगलवार को PMCH में प्रशांत की लाश का पोस्टमार्टम हुआ। इस दरम्यान जो खुलासा हुआ है, वो चौंकाने वाला है। PMCH के सूत्रों से जो जानकारी भास्कर के हाथ लगी है, उसके अनुसार प्रशांत के सिर पर क्या, शरीर के किसी भी हिस्से में गोली मारे जाने के निशान नहीं मिले हैं। उसे गोली मारे जाने की पुष्टि पोस्टमार्टम के दौरान नहीं हुई है।

प्रशांत की हत्या दो तरीकों से की गई है। पहला तरीका ये है कि उसके गले को दबाया गया है। क्योंकि, प्रशांत के गले पर रस्सी का निशान मिला है। दूसरा तरीका यह है कि उसका सिर फटा हुआ मिला है। उसके सिर के बाएं तरफ गहरी चोट का निशान है। जिससे अंदाजा लगाया गया है कि किसी ने उसके सिर पर लोहे के रड या किसी दूसरे भारी सामान से तेज वार किया था। इन्हीं दोनों तरीकों से उसकी हत्या की गई है। पोस्टमार्टम के दौरान यह भी स्पष्ट हो गया कि इसने शराब नहीं पी थी। हालांकि, इस पोस्टमार्टम का आधिकारिक रिपोर्ट आना बाकी है। सूत्र की मानें तो लाश ताजा हालत में थी। यानी हत्या की वारदात सोमवार को ही हुई है। जिस तरह से गला दबाया गया और सिर पर वार किए गए, इसके पीछे एक बड़ी साजिश की बू आ रही है।

पड़ोसियों ने भी नहीं सुनी गोली की आवाज
जक्कनपुर थाना के पोस्टल पार्क के रोड नंबर 3 में लंबे वक्त से प्रशांत बिहार पुलिस से रिटायर्ड अपने दारोगा मामा एसएन मिश्रा के घर में रह रहा था। मूल रूप से ये पटना में ही आलमगंज थाना के तहत अशोका विहार के आदिवासी कॉलोनी का रहने वाला था। पैर से दिव्यांग भी था। प्रशांत की हत्या का मामला सोमवार की देर रात सामने आया था। उसकी लाश बंद कमरे के अंदर बोरे में रखी हुई मिली थी। पुलिस उसी वक्त से कह रही है कि उसकी हत्या गोली मारकर की गई। भास्कर टीम ने जब इलाके में पड़ताल की और आसपास रहने वाले लोगों से पूछा तो पता चला कि किसी ने भी गोली चलने की आवाज नहीं सुनी।

परिवार वालों ने झूठ क्यों बोला?
पुलिस टीम को मामा यानी एसएन मिश्रा व उनके परिवार वालों ने कहा था कि वो लोग घर में मौजूद नहीं थे। किसी समारोह में गए हुए थे और जब वापस लौटे तब तक प्रशांत की हत्या हो चुकी थी। मगर, पड़ोसियों से जो जानकारी मिली उसके मुताबिक एसएन मिश्रा की पत्नी की सोमवार को बरसी थी और इसका कार्यक्रम घर में आयोजित हुआ था। परिवार के सारे सदस्य घर में ही थे। कोई बाहर नहीं गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि एसएन मिश्रा व उनके परिवार के लोगों ने झूठ क्यों बोला कि वो लोग बाहर गए हुए थे?

गुंडा बनने की सनक थी सवार
आदिवासी कॉलोनी के रहने वाले सूत्र बताते हैं कि प्रशांत प्लास्टिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका था। यह पढ़ाई उसने कुछ साल पहले कोटा से की थी। पढाई पूरी करने के बाद वो पटना गया था। कुछ समय तक फतुहा की एक फैक्ट्री में उसने काम भी किया था। लेकिन, उसके उपर कुछ और ही सनक सवार थी। वो गुंडा बनना चाहता था। इसी वजह से वो शराब के धंधे में आया। उसके खिलाफ आलमगंज समेत राजधानी के कुछ और थानों में भी केस दर्ज है। फिलहाल जक्कनपुर थाना की पुलिस ने इस मामले में प्रशांत के पार्टनर अभिषेक को ही डिटेन कर रखा है। इस मामले को लेकर पटना के सिटी एसपी ईस्ट और सदर एएसपी से बात करने की कोशिश की गई। पर हो नहीं सकी।

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