45 वर्षों से न्यूनतम खर्च पर उपचार: शहर का प्रभात तारा अस्पताल हर साल सर्पदंश के 18 हजार से अधिक मरीजों की बचाता है जान

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मुजफ्फरपुर16 मिनट पहलेलेखक: असलम अख्तर

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इस माह अब तक 650 से अधिक मरीज आए, जिनमें 649 की बचाई जान

शहर का प्रभात तारा अस्पताल सर्पदंश के मरीजों के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। आम दिनों में यहां प्रतिदिन सर्पदंश के 35-40 तो बारिश व गर्मी में 60-70 मरीज आते हैं। प्रतिवर्ष 18 हजार से अधिक पहुंचते हैं। इस माह अबतक सर्पदंश के 650 से अधिक मरीज यहां भर्ती किए गए जिनमें एक की मौत हुई।

बुधवार को भी 60 मरीज आए। मुजफ्फरपुर के अलावा यहां समस्तीपुर, शिवहर, पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, दरभंगा, वैशाली, सीतामढ़ी एवं मधुबनी जिले के अलावा नेपाल के बॉर्डर इलाके के भी मरीज इलाज के लिए आते हैं। सर्पदंश के मरीजों का 100 रुपया शुल्क लेकर एक साल के लिए कार्ड बनाया जाता है। वहीं, ओपीडी में दिखाने के लिए मरीज से महज 10 रुपया शुल्क लिया जाता हैं।

जर्मनी व दक्षिण अफ्रीका में पाए जाने वाले स्नेक स्टोन से होता है मरीजों का इलाज

अस्पताल इंचार्ज सिस्टर ग्लेडिस ने बताया कि यहां स्नैक स्टोन (जो जर्मनी व दक्षिण अफ्रीका में पाया जाता है) के साथ-साथ एंटी वेनम से सर्पदंश मरीजों का इलाज किया जाता है। स्नेक स्टोन को सर्पदंश वाले स्थान पर बांध कर 5 घंटे ऑब्जर्वेशन में रखा जाता है। जिस मरीज के पूरे शरीर में जहर फैल गया होता है, उसके सर्पदंश के स्थान पर 12-12 घंटे में पत्थर बदला जाता है। मरीज के ठीक होने पर पत्थर को दूध में 5 घंटे रखने के बाद उस पत्थर से दूसरे मरीज का इलाज होता है। मरीज जितनी जल्दी आते हैं, जान बचने की संभावना उतनी अधिक होती है।

1976 में यहां हुई थी इस अस्पताल की स्थापना

1976 में होली क्रॉस सिस्टर्स स्विटजरलैंड की मदद से इस हॉस्पिटल की स्थापना हुई थी। 45 वर्षों में यह लाखों मरीजों की जान बचा चुका है। बताया गया कि पत्थर से मरीजों के इलाज के साथ ही एंटी वेनम इंजेक्शन की जरूरत होती है, जो काफी महंगी होती है। मरीजों को एंटी वेनम अपने स्तर से लाना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग या सरकार के स्तर से इसकी व्यवस्था हो जाए तो लोगों को काफी राहत मिलेगी। अस्पताल में वेंटिलेटर की कमी है। इसकी व्यवस्था भी जरूरी है।

एसकेएमसीएच-सदर अस्पताल में भी है व्यवस्था

एसकेएमसीएच व सदर अस्पताल में भी सर्पदंश मरीजों का इलाज होता है। लेकिन, बहुत कम मरीज वहां आते हैं। एसकेएमसीएच अधीक्षक डॉ. बीएस झा ने बताया कि यहां सर्पदंश के गंभीर मरीजों का इलाज इमरजेंसी में किया जाता है। जरूरत पड़ने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा जाता है। वहीं, सिविल सर्जन डॉ. विनय कुमार शर्मा ने कहा कि सदर अस्पताल समेत सभी पीएचसी में सर्पदंश के मरीजों के इलाज का पुख्ता इंतजाम है।

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