CM बड़े या सहकारिता विभाग: नीतीश ने 21 फरवरी तक बढ़ाई थी धान खरीद की तारीख, विभाग ने 27 जनवरी तक ही लिया आवेदन

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पटना7 घंटे पहले

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सहकारिता विभाग की साइट पर दिख रहा कि धान अधिप्राप्ति के लिए आवेदन बंद है।

  • सरकार ने किसानों के लिए हर साल होने वाले निबंधन की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी है
  • कृषि विभाग की साइट पर रजिस्टर्ड हैं एक करोड़ से ज्यादा किसान, अब तक हुई 6 लाख 70 किसानों से ही खरीद

28 जनवरी को जारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का फैसला बिहार के किसानों के लिए नो वैलिडिटी वाला स्कीम बन चुका है। असल में बीते 28 जनवरी को कृषि, सहकारिता और खाद्य आपूर्ति विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने किसानों से धान खरीदने के लिए अंतिम तिथि 31 जनवरी से बढ़ाकर 21 फरवरी कर दी थी, लेकिन सहकारिता विभाग ने धान खरीद के लिए आवेदन लेना 27 जनवरी को ही बंद कर दिया।सहकारिता विभाग के इस निर्णय ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फैसले को किसानों के लिए बेमतलब का बना दिया है।

वन टाइम रजिस्ट्रेशन का आदेश भी बेअसर
मुख्यमंत्री ने 12 फरवरी को मीडिया को दिए अपने बयान में कहा था कि सरकार ने किसानों के लिए हर साल होने वाले निबंधन की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी है। इसका मतलब यह था कि जिन किसानों ने कृषि विभाग की वेबसाइट पर निबंधन करा रखा है, उन्हें सहकारिता विभाग में भी स्वत: निबंधित मान लिया जाएगा। लेकिन मुख्यमंत्री के इस फैसले और बयान से परे, इस साल भी सभी किसानों को सहकारिता विभाग की बेबसाइट पर धान खरीद के लिए आवेदन देना पड़ा। यही वजह है कि कृषि विभाग की वेबसाइट पर रजिस्टर्ड एक करोड़ से ज्यादा किसानों को नरअंदाज करते हुए सहकारिता विभाग 6 लाख 70 किसानों से ही धान खरीद कर अपनी पीठ थपथपाने में लगा है।

खरीद के लिए ई-पैक्स में किसान का नाम है जरूरी
असल में सरकार के फैसले और कार्यान्वयन में समन्वय की जबरदस्त कमी दिख रही है। कृषि विभाग की बेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन के बावजूद किसानों को धान बेचने के लिए सहकारिता विभाग में निबंधन कराना जरूरी है, क्योंकि बिना इस निबंधन के किसान का नाम ई-पैक्स एप पर नहीं होगा। पैक्स अध्यक्षों से मिली जानकारी के मुताबिक कोई भी पैक्स, ई-पैक्स में नाम वाले किसान से ही धान खरीद सकता है,क्योंकि इसी में किसान का पूरा डेटा उपलब्ध होता है। इसके आधार पर ही धान लेने के बाद किसानों के खातों में राशि का भुगतान किया जाता है।

किसान और पैक्सों की मांग, सहकारिता विभाग ले आवेदन
मुख्यमंत्री के फैसले और सहकारिता विभाग के फरमान के बीच बिहार के किसान और पैक्स दोनों परेशान हैं। 21 फरवरी तक धान खरीद की तिथि बढ़ने के बावजूद किसान अपना धान पैक्स को नहीं बेच पा रहे हैं और ना ही पैक्स किसानों से धान खरीद पा रहे हैं। सीवान के दरौंधा के करसौत पैक्स के अध्यक्ष चुनचुन सिंह कहते हैं कि हम परेशान हैं। किसान हमारे पास आ रहे हैं लेकिन हम उनसे धान नहीं ले पा रहे हैं। यह हाल तब है जब हमारे पास फंड मौजूद है। वजह यह है कि जो किसान हमारे पास अब आ रहे हैं उन्होंने कृषि विभाग में तो रजिस्ट्रेशन कराया है लेकिन सहकारिता विभाग में आवेदन नहीं दिया है। ऐसे में सहकारिता विभाग के ई-पैक्स एप पर उनका नाम नहीं है। ऐसे में हम उनके धान ले भी लें तो उन्हें पैसा नहीं दे पाएंगे।

21 फरवरी से आगे नहीं बढे़गी खरीद की तिथि
सहकारिता और खाद्य उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रधान सचिव ने आज धान खरीद को लेकर एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की थी। दोनों विभागों ने ही रिकॉर्ड धान खरीद किए जाने का दावा किया। अधिकारियों के मुताबिक अबतक 30 लाख मिट्रिक टन धान खरीद हो चुकी है। यह पूछे जाने पर कि क्या फिर से धान खरीद की तिथि आगे बढे़गी,अधिकारियों ने साफ कहा कि अब तारीख आगे नहीं बढे़गी।



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