LIC की अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी: एक दिन की हड़ताल पर हैं जीवन बीमा निगम के कर्मचारी, बिहार-झारखंड-ओडिशा में 200 करोड़ का लेनदेन प्रभावित

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पटना13 मिनट पहले

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पटना में गुरुवार को हड़ताल के कारण बंद पड़ा LIC का मुख्य कार्यालय।

दो दिन की बैंक हड़ताल, फिर एक दिन सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों की हड़ताल और अब LIC के अधिकारियों व कमर्चारियों की हड़ताल। हड़ताल के इस क्रम का आज चौथा दिन है। केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों का जमकर विरोध हो रहा है। गुरुवार को बिहार सहित पूरे देश भर में LIC जोनल, रीजनल और ब्रांच ऑफिसों में ताला लटका रहा। अकेले बिहार में राजधानी पटना समेत तमाम जिलों में LIC के करीब 150 ऑफिसों में काम-काज पूरी तरह से ठप रहा। 10 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह से हड़ताल पर रहे।

गुरुवार को अकेले बिहार में करीब 100 करोड़ रुपयों का लेन-देन प्रभावित रहा, जबकि बिहार-झारखंड और ओडिशा को मिलाकर 200 करोड़ से अधिक का लेन-देन प्रभावित हुआ है। यह तीनों राज्य एक ही जोन के अंदर आते हैं। इंश्योरेंस इम्प्लॉएज एसोसिएशन पटना डिवीजन के महामंत्री अनिल कुमार ने कहा है कि आज तो LIC के अधिकारी और कर्मचारी एक दिन के आंदोलन पर हैं। अगर केंद्र सरकार अपनी आर्थिक नीतियों में बदलाव नहीं लाती है तो पूरे देश में अनिश्चितकालीन आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि वो आंदोलन सिर्फ LIC का नहीं होगा। अनिश्चितकालीन आंदोलन में सभी बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र की सभी बीमा कंपनियां और LIC शामिल होगी। नरेंद्र मोदी की सरकार को अपने फैसलों में बदलाव करना होगा।

पटना में धरना देते LIC के अधिकारी और कर्मचारी।

पटना में धरना देते LIC के अधिकारी और कर्मचारी।

इन मांगों को लेकर हुई हड़ताल
सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों की तरह ही LIC भी 49 प्रतिशत की जगह प्रस्तावित 74 प्रतिशत FDI का विरोध कर रही है। केंद्र सरकार की तरफ से LIC के IPO लाने के लिए की गई घोषणा का भी विरोध किया जा रहा है। हड़ताल करने का इनका तीसरा बड़ा मुद्दा है कि 1 अगस्त 2017 से वेतन पुनरीक्षण का काम भी पेंडिंग पड़ा हुआ है। LIC के अधिकारियों की मानें तो केंद्र सरकार अगर अपनी आर्थिक नीतियों में बदलाव नहीं लाती है और अपने फैसलों को वापस नहीं लेती है तो इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है। निजीकरण का सीधा असर उनके ऊपर ही होगा। पटना के फ्रेजर रोड स्थित LIC ऑफिस के बाहर ओम प्रकाश, अनिल कुमार, एसएन श्रीवास्तव, विनय यादव, डॉ. भोला पासवान और पुष्पा केसरी सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी धरना पर बैठे रहे और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों का अपने भाषणों के जरिए विरोध करते रहे।

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